पाकिस्तान से बड़ी संख्या में नागरिक बेहतर जीवन की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं, लेकिन हालिया आंकड़े एक चौंकाने वाली सच्चाई को सामने लाते हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा नेशनल असेंबली में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 और 2025 के पहले पांच महीनों में कुल 5,402 पाकिस्तानी नागरिकों को विभिन्न देशों से भीख मांगने के आरोप में निष्कासित किया गया है।
धार्मिक या वर्क वीजा लेकर पहुंचे, लेकिन बन गए भिखारी
रिपोर्ट में बताया गया कि इन लोगों ने खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में धार्मिक या कामकाजी वीजा के जरिए प्रवेश किया, लेकिन वहां जाकर इन्होंने भिक्षावृत्ति को अपना पेशा बना लिया। इस प्रवृत्ति ने न केवल पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि प्रवासी नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साल 2024 में सबसे ज्यादा निष्कासन
2024 में निष्कासित किए गए कुल 4,850 पाकिस्तानी भिखारियों में से 4,498 अकेले सऊदी अरब से थे। इसके अलावा इराक से 242, मलेशिया से 55, और यूएई से 49 लोगों को वापस भेजा गया। सभी ने धार्मिक तीर्थ या रोजगार की आड़ में वीजा प्राप्त किया था।
2025 में भी जारी रहा यह सिलसिला
2025 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) में 552 पाकिस्तानी नागरिकों को विदेशों से निकाला गया, जिनमें से 535 केवल सऊदी अरब से, 9 यूएई और 5 इराक से निष्कासित हुए।
सरकारी नीतियों पर उठे सवाल
इस मामले ने पाकिस्तान की प्रवासी नीतियों और वीजा जांच प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्या विदेश जाने वालों की पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच की जा रही है? गृह मंत्रालय ने वादा किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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