विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ने के चार साल बाद अपने फैसले पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कप्तानी छोड़ने के समय उन्हें खुद पर विश्वास की कमी हो गई थी और उनका नेतृत्व करने का जज्बा समाप्त हो गया था। कोहली ने कहा, “जिस समय मेरी कप्तानी का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, ईमानदारी से कहूं तो मुझे खुद पर ज्यादा भरोसा नहीं था। इसे लेकर मेरे अंदर कोई जज्बा नहीं बचा था।” उन्होंने यह भी बताया कि वह खुद से कह रहे थे कि उन्होंने काफी उतार-चढ़ाव झेले हैं अब इसे और नहीं संभाल सकते। उनकी जगह दक्षिण अफ्रीका के फाफ डु प्लेसिस टीम के कप्तान बने थे। विराट कोहली ने यह भी बताया कि जब वह कप्तान थे तो एम एस धोनी हमेशा उन्हें सलाह देते थे। कोहली के मुताबिक धोनी उन्हें लगातार सलाह देते रहते थे और अगर किसी और प्लान पर काम करना हो तो फिर वह धोनी से खुलकर कहते भी थे कि हमें इस दूसरी रणनीति को अपनाना चाहिए। विराट कोहली के लिए 2014 का इंग्लैंड दौरा निराशाजनक रहा था। कोहली ने इस दौरे पर पांच टेस्ट मैचों की 10 पारियों में 13.50 की औसत से रन बनाए थे। इसके बाद आस्ट्रेलिया दौरे में उन्होंने शानदार वापसी की थी। कोहली ने कहा कि उस दौर में उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वह दुनिया में अकेले इंसान हैं। उन्होंने कहा, “यह वह दौर था जबकि मैं चीजों को बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकता था। मुझे ऐसा महसूस होता था कि जैसे मैं दुनिया में अकेला इंसान हूं।”
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