वॉट्सएप-यूजरनेम विवाद पर जवाब की समयसीमा 9 जुलाई तक बढ़ी, सरकार ने जताई फ्रॉड की आशंका
channel_009 | Technology News
वॉट्सएप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर चल रहे विवाद में अब सरकार ने जवाब देने की समयसीमा बढ़ाकर 9 जुलाई कर दी है। सरकार का कहना है कि इस फीचर से ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए कंपनी से साफ जवाब मांगा गया है।
दरअसल, वॉट्सएप यूजरनेम सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसके जरिए लोग मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम से भी जुड़ सकेंगे। कंपनी इसे प्राइवेसी के लिहाज से बेहतर मान सकती है, लेकिन सरकार की चिंता यह है कि अगर नंबर की पहचान छिप गई, तो साइबर अपराधियों को फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने का नया रास्ता मिल सकता है।
सरकार ने वॉट्सएप से पूछा है कि ऐसे यूजरनेम की पहचान कैसे होगी, फेक अकाउंट्स पर रोक कैसे लगेगी और किसी फ्रॉड की शिकायत आने पर आरोपी तक पहुंचने की प्रक्रिया क्या होगी। खासकर डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी पहले ही खुद को पुलिस, CBI या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। ऐसे में यूजरनेम फीचर उनके लिए और आसान हथियार बन सकता है।
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्राइवेसी जरूरी है, लेकिन सुरक्षा और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। अगर यूजरनेम फीचर लागू होता है, तो मजबूत वेरिफिकेशन, रिपोर्टिंग सिस्टम और ट्रेसिंग मैकेनिज्म बेहद जरूरी होंगे।
channel_009 निष्कर्ष:
वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर प्राइवेसी बढ़ा सकता है, लेकिन अगर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रही तो ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में बड़ा उछाल आ सकता है। अब सबकी नजर 9 जुलाई तक कंपनी के जवाब पर है।
आपकी राय क्या है — क्या वॉट्सएप यूजरनेम फीचर से प्राइवेसी बढ़ेगी या फ्रॉड का खतरा? कमेंट में बताइए।
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