भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। वह FIDE विमेंस कप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। यह उनके करियर की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है। उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में शानदार खेल दिखाते हुए अपने प्रतिद्वंदी को हराकर इतिहास रच दिया।
FIDE विमेंस कप एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का महिला शतरंज टूर्नामेंट है, जिसमें दुनिया की टॉप महिला खिलाड़ी हिस्सा लेती हैं। इस टूर्नामेंट को जीतना बहुत प्रतिष्ठित माना जाता है, और यह वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में जगह बनाने के लिए भी अहम होता है।
भारत की एक और दिग्गज शतरंज खिलाड़ी कोनेरु हम्पी भी इस टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं। हालांकि उनका सेमीफाइनल मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ है, इसलिए अब फैसला टाई-ब्रेकर मैच से होगा। यह मैच बहुत रोमांचक रहने वाला है क्योंकि हम्पी का अनुभव और दिव्या की युवा ऊर्जा दोनों भारत के लिए गौरव की बात हैं।
दिव्या देशमुख ने सिर्फ 5 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था और आज वह भारत की सबसे होनहार महिला ग्रैंडमास्टर में से एक हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीती हैं। उनकी मेहनत और लगन से ही वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं।
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