सीकर। अब स्कूली बच्चे अपनी स्थानीय भाषा और बोली में कविताएं पढ़ेंगे और बोलेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई कराना आसान और प्रभावी माना गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय शिक्षा और साक्षरता विभाग देशभर से लोक कविताएं इकट्ठा कर रहा है।
कोई भी भेज सकता है लोक कविता
इस काम के लिए “बालपन की कविता पहल” नाम से एक ऑनलाइन प्रतियोगिता चलाई जा रही है। इसमें कोई भी व्यक्ति सरकारी पोर्टल पर जाकर लोक कविताएं अपलोड कर सकता है। राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस बारे में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
किस तरह की कविताएं चाहिए?
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भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई और लोक परंपराओं पर आधारित कविताएं
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पहले से प्रचलित कविताएं या स्वयं द्वारा लिखी गई रोचक कविताएं
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कविताएं किसी भी भारतीय भाषा या अंग्रेज़ी में हो सकती हैं
तीन आयु वर्गों में प्रतियोगिता
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प्री-प्राइमरी (3-6 साल)
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ग्रेड 1 (6-7 साल)
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ग्रेड 2 (7-8 साल)
प्रतियोगिता में 22 अप्रैल तक “माई गवर्नमेंट” पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। जीतने वालों को प्रमाण पत्र और नकद इनाम मिलेगा।
बच्चों को मिलेगा अपनी संस्कृति से जुड़ाव
नई शिक्षा नीति के अनुसार बच्चों को पांचवीं तक की पढ़ाई मातृभाषा में कराने की योजना है। लोक कविताएं बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और आस-पास की दुनिया से जोड़ने का अच्छा तरीका मानी जा रही हैं।
अब स्कूल की किताबों में भी स्थानीय शब्दों और कहावतों को शामिल किया जा रहा है, जिससे बच्चे जटिल बातें भी अपनी भाषा में आसानी से समझ सकें।
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