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राजस्थान में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर जारी फरवरी 2026 के शिविरा पंचांग ने शिक्षकों और लाखों बोर्ड विद्यार्थियों को उलझन में डाल दिया है। कारण यह है कि बोर्ड परीक्षाओं के बीच ही कुछ आयोजनों के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला
प्रदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च तक चलेंगी। इसी दौरान शिविरा पंचांग में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस मनाने के निर्देश दिए गए हैं।
समस्या यह है कि 28 फरवरी को ही कई बोर्ड परीक्षाएं भी हैं—
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10वीं बोर्ड: संस्कृत
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12वीं बोर्ड: अर्थशास्त्र, कृषि जीव विज्ञान और जीव विज्ञान
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5वीं बोर्ड: पर्यावरण अध्ययन
ऐसे में शिक्षक यह समझ नहीं पा रहे हैं कि परीक्षा के बीच आयोजन कैसे किया जाए।
परीक्षा के बाद छात्रों को रोकना मुश्किल
शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा खत्म होते ही छात्र घर चले जाते हैं। उन्हें रोकना संभव नहीं होता, क्योंकि अगली परीक्षा की तैयारी भी करनी होती है। परीक्षा के अनुसार ही कक्षों और स्टाफ की व्यवस्था रहती है।
आयोजन करना व्यावहारिक नहीं
शिक्षक संगठनों के अनुसार परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले और परीक्षा के बाद एक घंटे तक पूरा समय परीक्षा कार्य में ही चला जाता है। ऐसे में किसी बड़े आयोजन के लिए समय निकालना मुश्किल है।
शिक्षक संगठनों की राय
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के जिलाध्यक्ष दिनेश मईड़ा ने कहा कि सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन परीक्षा के बीच आयोजन करना संभव नहीं है।
रेसला के जिलाध्यक्ष राहुल डिण्डोर ने भी कहा कि महापुरुषों से जुड़ी जानकारी छात्रों तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन इस स्थिति में आयोजन केवल औपचारिक ही रखा जाएगा।
शिक्षकों की चिंता
शिक्षकों को डर है कि यदि आयोजन नहीं किया गया तो विभागीय कार्रवाई हो सकती है। इसी वजह से वे असमंजस में हैं कि परीक्षा को प्राथमिकता दें या आयोजन को।
अब शिक्षक सरकार से इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि परीक्षा और आयोजन दोनों को लेकर स्थिति साफ हो सके।
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