संभल के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के अचानक तबादले को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताया और कहा कि भाजपा सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए तबादलों का इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस ने इसे तानाशाही एजेंडा करार दिया और सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
विवाद की वजह
संभल हिंसा मामले में विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को तत्कालीन सर्किल अफसर अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद उनका अचानक तबादला कर दिया गया। कांग्रेस ने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि न्यायपालिका पर संस्थानिक दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप है।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने कहा:
-
सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट को विभांशु सुधीर के तबादले पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
-
भाजपा सरकार न्यायपालिका पर दबाव डाल रही है और तबादलों का इस्तेमाल न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने के लिए कर रही है।
-
संभल में सीजेएम का अचानक ट्रांसफर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि सोची-समझी कार्रवाई है, जो न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला है।
वकीलों और जनता की प्रतिक्रिया
संभल के वकीलों ने भी इस तबादले का विरोध किया और कहा कि यह न्यायपालिका की आजादी को कमजोर करने की कोशिश है।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संवैधानिक संतुलन पर हमला है।
यदि चाहें तो मैं इसे और अधिक संक्षिप्त और आसान वाक्यों में “तुरंत समझ आने वाला संस्करण” भी बना दूँ, ताकि कोई भी व्यक्ति तुरंत समझ सके कि पूरा मुद्दा क्या है।
क्या मैं वह संस्करण तैयार कर दूँ?
CHANNEL009 Connects India
