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उज्जैन (म.प्र.):
सावन महीने में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी में हर साल लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। लेकिन भीड़ की वजह से बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांग लोग पालकी के ठीक से दर्शन नहीं कर पाते। इस समस्या को देखते हुए एक नया मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें बाबा की पालकी को छोटे ट्रॉले पर रखा जाएगा।
क्या है नया मॉडल?
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पालकी को एक सजाए गए ट्रॉले पर रखा जाएगा, जो भक्तों को ऊंचाई से सुलभ दर्शन देगा।
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ट्रॉले को ऐसा डिज़ाइन किया जाएगा कि उसमें त्रिशूल, डमरू, बेलपत्र आदि से सजावट हो।
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ट्रॉले को नंदी के रूप में बनाया जाएगा और उसके नीचे जनरेटर व सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे।
दर्शन होंगे आसान, सुरक्षा बेहतर
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इस मॉडल से न तो परंपरा में कोई बदलाव होगा और न ही पुजारी या कहारों की भूमिका में।
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भीड़ को आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा और पुलिस प्रशासन का तनाव भी कम होगा।
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ट्रॉले पर जीपीएस, जैमर और पोर्टेबल सीढ़ियों जैसी सुविधाएं रहेंगी ताकि वीआईपी और आम भक्त दोनों पूजा-अर्चना कर सकें।
पहले भी दिया जा चुका है प्रस्ताव
शैलेंद्र व्यास स्वामी ‘मुस्कुराके’ ने यह मॉडल 2016 से कई बार मंदिर समिति, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भेजा है। अब जनता और प्रशासन की सहमति मिलने पर इसे प्रायोगिक तौर पर लागू किया जा सकता है।
मूलभूत सुविधाओं की भी जरूरत
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पेयजल, शौचालय, पार्किंग और छाया वाले स्थान भी हर साल सवारी मार्ग पर जरूरी होते जा रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि सिर्फ पालकी की ऊंचाई नहीं, बल्कि पूरे आयोजन में भक्तों की सुविधा पर ध्यान दिया जाए।
जनता से मांगे गए सुझाव
अगर आप भी चाहते हैं कि बाबा महाकाल की पालकी की ऊंचाई बढ़ाई जाए या नया मॉडल लागू हो, तो अपने सुझाव इस व्हाट्सऐप नंबर – 8103843438 पर भेज सकते हैं।
निष्कर्ष:
महाकाल की सवारी को और अधिक भक्तों के लिए सुलभ और सुरक्षित बनाने की दिशा में यह एक अनूठा कदम हो सकता है। परंपरा को बनाए रखते हुए अगर तकनीक की मदद ली जाए, तो श्रद्धालु बिना धक्का-मुक्की के बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
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