भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अमेरिका भले ही खुद को शांति का सूत्रधार बताने में लगा है, लेकिन जब बात पाकिस्तान की आतंकवाद से कथित सांठगांठ की होती है, तो अमेरिकी नेतृत्व जवाब देने से कतराता नजर आता है।
सीजफायर का क्रेडिट, लेकिन आतंक पर चुप्पी
चार दिन तक चले सीमा पर तनाव के बाद दोनों देशों के बीच जो सीजफायर हुआ, उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार इस फैसले का श्रेय खुद को दिया। वाशिंगटन में भी व्हाइट हाउस और विदेश विभाग की ओर से इस कदम का स्वागत किया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करता है।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान को आतंकी समूहों को समर्थन बंद करने के लिए कोई प्रतिबद्धता दी गई है, तो वह जवाब देने से बचते नजर आए। पिगॉट ने बस इतना कहा, “हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान आपस में सीधा संवाद बनाए रखें।”
ट्रंप की ‘शांति निर्माता’ छवि पर सवाल
ट्रंप ने अपने सऊदी दौरे में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने ‘व्यापारिक दबाव’ के जरिए भारत और पाकिस्तान को सीजफायर के लिए मजबूर किया। खुद को ‘शांति निर्माता’ कहने वाले ट्रंप इस दौरान सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटाने की घोषणा कर पहले ही सुर्खियों में हैं।
भारत ने खारिज किए ट्रंप के दावे
भारत ने ट्रंप के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया कि कोई व्यापारिक दबाव इस फैसले के पीछे था। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने साफ कहा कि यह फैसला अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया गया था, न कि किसी बाहरी दबाव में।
आतंक के खिलाफ चला ऑपरेशन सिंदूर
इस बीच, भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मौजूद 9 आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया और करीब 100 आतंकवादियों को मार गिराया।
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