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टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे से मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम के अंदर हलचल बढ़ गई है। ग्रुप स्टेज खत्म होने के बाद अब सुपर-8 के मुकाबलों का समीकरण बन रहा है। इसी बीच टीम के ड्रेसिंग रूम से खबर आ रही है कि सुपर-8 में संभावित ड्रॉ और स्पिन वाली पिचों को लेकर खिलाड़ियों और मैनेजमेंट के बीच मतभेद हैं।
बताया जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया अपने ग्रुप में पहले स्थान पर रहता है, तो उसे सुपर-8 में भारत का सामना चेन्नई या कोलकाता जैसी स्पिन अनुकूल पिच पर करना पड़ सकता है। यही बात टीम के अंदर चिंता का कारण बनी हुई है। आधिकारिक रूप से इसे “रोटेशन पॉलिसी” कहा जा रहा है, लेकिन अंदरखाने इसे डर से जुड़ा फैसला माना जा रहा है।
क्या जानबूझकर हारने की चर्चा हुई?
कुछ सूत्रों के अनुसार टीम की बैठक में यह चर्चा हुई कि क्या अंतिम ग्रुप मैच में बेंच खिलाड़ियों को मौका देकर टीम को दूसरे स्थान पर रखा जाए, ताकि सुपर-8 में भारत से स्पिन पिच पर मुकाबला टाला जा सके। इस विचार पर टीम के अंदर बहस छिड़ गई।
कहा जा रहा है कि कुछ सीनियर तेज गेंदबाज इस तरह की रणनीति के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि टीम को डर के कारण अपनी खेल शैली नहीं बदलनी चाहिए। वहीं कोचिंग स्टाफ एशियाई पिचों पर पिछले प्रदर्शन को लेकर सतर्क है।
स्पिन बनाम पेस की बहस
सुपर-8 के लिए प्लेइंग इलेवन को लेकर भी चर्चा तेज है। मैनेजमेंट 4 स्पिनर और 1 पेसर के संयोजन पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो किसी प्रमुख तेज गेंदबाज को बाहर बैठना पड़ सकता है। इस फैसले को लेकर ड्रेसिंग रूम में मतभेद बढ़ रहे हैं।
कुछ खिलाड़ियों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया की ताकत उसकी तेज गेंदबाजी रही है, और अगर टीम अपनी पहचान छोड़कर दूसरों की रणनीति अपनाएगी, तो नुकसान हो सकता है।
पिछले अनुभव का असर
2024 में सुपर-8 चरण में भारत और अफगानिस्तान से मिली हार अब भी टीम के दिमाग में है। इसी कारण इस बार खिलाड़ी और मैनेजमेंट ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं।
अब देखना होगा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी पारंपरिक आक्रामक क्रिकेट पर भरोसा रखता है या परिस्थितियों को देखकर रणनीति बदलता है। आने वाले मुकाबले ही तय करेंगे कि यह रणनीति सही साबित होती है या नहीं।
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