सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “RTI एक्टिविज्म अब बिजनेस बन गया है”
नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (RTI) कानून को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में RTI एक्टिविज्म अपने मूल उद्देश्य से भटककर एक प्रकार का “बिजनेस” बनता दिखाई दे रहा है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों और विभागों की कार्यप्रणाली की निगरानी करने का प्राथमिक दायित्व संबंधित प्रशासनिक तंत्र का है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर एक्टिविस्ट किस अधिकार के तहत हर सरकारी गतिविधि की निगरानी करने का दावा करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद RTI के उपयोग और उसके दायरे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। न्यायालय ने संकेत दिया कि सूचना का अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि RTI कानून ने पिछले दो दशकों में शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि कई मामलों में इसके दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, जिन पर अदालतों ने समय-समय पर टिप्पणी की है।
RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कानून आम नागरिकों को सरकारी कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार देता है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना मांगने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है। मामले की अगली सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर सभी की नजर बनी हुई है।
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