हॉलीवुड के एक समय के सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्माता हार्वे वीनस्टीन को यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में फिर से दोषी पाया गया है। यह फैसला उस बहुचर्चित #MeToo अभियान के बाद आया है जिसने वैश्विक स्तर पर यौन शोषण के खिलाफ आवाज़ को मजबूती दी थी। हालांकि, अन्य आरोपों पर निर्णय विभाजित रहा।
मैनहट्टन कोर्ट में दोबारा सुनवाई
न्यूयॉर्क की एक अदालत में बुधवार को हुई पुनः सुनवाई में 2006 की एक घटना के मामले में वीनस्टीन को दोषी ठहराया गया, जिसमें उन्हें एक महिला को जबरदस्ती यौन क्रिया के लिए मजबूर करने का दोषी माना गया। वहीं, एक अन्य आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया और तीसरे मामले में जूरी अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।
पहली सजा पलटने के बाद फिर से ट्रायल
2020 में वीनस्टीन को पहली बार यौन हिंसा के मामलों में दोषी करार दिया गया था, जिससे हॉलीवुड में एक बड़े सत्ता-पतन की शुरुआत हुई थी। हालांकि, 2023 में अदालत ने यह सजा पलट दी थी और मामले को दोबारा मैनहट्टन कोर्ट भेजा गया।
वीनस्टीन का बचाव और इनकार
अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से वीनस्टीन लगातार इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों का दावा है कि यौन संबंध आपसी सहमति से थे और आरोप लगाने वाली महिलाएं मनोरंजन जगत में करियर बनाने के लिए यह सब कर रही थीं। वीनस्टीन का कहना है कि उन्होंने कभी किसी महिला का उत्पीड़न नहीं किया।
80 से अधिक महिलाएं आगे आईं
#MeToo आंदोलन की शुरुआत के साथ ही वीनस्टीन पर करीब 80 से ज्यादा महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इनमें कई नामचीन अभिनेत्रियाँ और इंडस्ट्री से जुड़ी महिलाएं शामिल थीं। इन आरोपों ने हॉलीवुड से लेकर वैश्विक फिल्म उद्योग तक झटके दिए और एक सामाजिक आंदोलन की नींव रखी।
निष्कर्ष:
हार्वे वीनस्टीन पर चल रही कानूनी कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरे सिस्टम के खिलाफ आवाज़ उठाने का प्रतीक बन गई है। #MeToo आंदोलन की ये कानूनी उपलब्धियाँ महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती हैं — कि अब चुप रहने का समय नहीं।
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