राजस्थान सरकार ने 2025 के बजट में कोटा मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपए की लागत से कैंसर यूनिट बनाने की घोषणा की थी। लेकिन 2026 तक भी यह सुविधा शुरू नहीं हुई। इससे हाड़ौती अंचल के कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीद अभी अधूरी है।
क्यों नहीं हुई सुविधा शुरू
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एमबीएस अस्पताल में कैंसर रोगियों को अभी भी कोबाल्ट मशीन से थैरेपी दी जाती है।
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आधुनिक लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन का इंतजार लंबे समय से है।
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इस मशीन की लागत लगभग 40-45 करोड़ रुपए है।
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निवेश और बजट की प्रक्रिया जयपुर स्तर पर लंबित होने के कारण प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया।
मरीजों की वर्तमान स्थिति
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कैंसर मरीजों को जयपुर या अन्य बड़े शहरों जाना पड़ता है, जिससे समय और खर्च बढ़ता है।
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कोटा मेडिकल कॉलेज में मशीन लगने पर हजारों मरीजों को राहत मिलेगी और सभी इलाज की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगी।
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मोड्यूलर ओटी भी बनाई जाएगी।
जागरूकता और कैंसर के कारण
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विश्व कैंसर दिवस 2026 की थीम: ‘United by Unique’ (अनूठेपन में एकता)।
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हाड़ौती अंचल में कैंसर के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारण:
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तंबाकू, गुटखा, स्मोकिंग
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लालदंत मंजन, शराब का सेवन
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असंतुलित जीवनशैली और गलत खानपान
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देर से जांच
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प्रमुख कैंसर प्रकार
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पुरुष: नाक, कान और गला
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महिला: ब्रेस्ट और बच्चेदानी
ओकों सर्जरी और जांच
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कोटा मेडिकल कॉलेज में 2024 से ओकों सर्जरी की सुविधा उपलब्ध।
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अब तक 250 मेजर सर्जरी की जा चुकी हैं।
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पैथोलॉजी में आईएससी मार्कर और अन्य डायग्नोसिस की सुविधा है।
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ओको वैन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप चलाए जा रहे हैं, अब तक 108 मरीज चिन्हित।
कोटा संभाग में पिछले चार साल के कैंसर मरीज
| वर्ष | मरीज संख्या |
|---|---|
| 2022 | 2785 |
| 2023 | 2872 |
| 2024 | 2893 |
| 2025 | 2724 |
सलाह और चेतावनी
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कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए तो इलाज संभव है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कम होने से कई लोग लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं।
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चिकित्सा विभाग समय-समय पर जांच शिविर और जागरूकता अभियान चला रहा है।
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लोगों से अपील:
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नियमित जांच कराएँ
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तंबाकू से दूरी बनाएं
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संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
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कैंसर से डरने के बजाय उससे लड़ें
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कैंसर मरीजों के आंकड़े (2023-2025)
| प्रकार | 2023 | 2024 | 2025 |
|---|---|---|---|
| नाक-कान-गला | 945 | 971 | 704 |
| आंत | 477 | 376 | 29 |
| ब्रेस्ट | 283 | 273 | 302 |
| बच्चेदानी | 182 | 141 | 153 |
निष्कर्ष: कोटा में कैंसर यूनिट अभी अधूरी है, हाड़ौती के मरीजों को आधुनिक उपचार की सुविधा के लिए अब भी इंतजार करना पड़ रहा है।
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