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राजस्थान पुलिस ने नकली सरसों बनाने और उसे असली सरसों में मिलाकर बेचने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का सरगना सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से नकली सरसों बनाने की मशीनें, विद्युत मोटर और छलनी सहित अन्य उपकरण जब्त किए हैं।
कैसे चलता था नकली सरसों का कारोबार?
यह गिरोह असली सरसों में मिलावट कर उसे बाजार में बेचता था। जांच में पता चला कि आरोपी रामगढ़ स्थित सहकारी क्रय विक्रय समिति से सरसों खरीदते थे और उसमें मिलावट कर वेयरहाउस खैरथल तक सप्लाई करते थे। कुछ आरोपी अपने घरों पर ही नकली सरसों तैयार कर बाजार में बेचते थे।
कैसे हुआ खुलासा?
राजस्थान पत्रिका ने 26 नवंबर 2024 को इस गड़बड़ी की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद नैफेड (NAFED) के अधिकारियों ने भंडारण गृह खैरथल में जांच की, जहां बड़े पैमाने पर मिलावटी सरसों मिली। मामला गंभीर होने के कारण 10 जनवरी 2025 को पुलिस में केस दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस उपाधीक्षक राजेन्द्र निर्वाण ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
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माधो चौधरी – नकली सरसों बनाने में लिप्त
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उन्नस खान – ट्रकों से असली सरसों निकालकर मिलावट करने वाला
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साहिल खान – सप्लाई नेटवर्क संभालने वाला
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सुरेश यादव – अपने घर पर नकली सरसों तैयार करने वाला
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ओमप्रकाश शर्मा – नकली सरसों के उत्पादन में संलिप्त
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सुरेश चौधरी – मिलावटी सरसों का मुख्य सप्लायर
राजकीय कोष को नुकसान और जन स्वास्थ्य पर खतरा
जांच में पाया गया कि 1450 कट्टे नकली सरसों का स्टॉक रखा गया था। यह राजकीय कोष को हानि पहुंचाने और लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने का मामला है।
खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
नकली सरसों का यह धंधा खाद्य सुरक्षा मानकों के खिलाफ था और लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ और नकली सरसों की बिक्री पर रोक लगाई जा सकी।
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