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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा 2025 के लिए स्टेशनरी खर्च को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), परीक्षा केंद्राध्यक्ष और शैक्षिक समन्वयकों के बीच पैसे के बंटवारे को लेकर भारी खींचतान चल रही है।
शिक्षकों को नहीं मिली खर्च की राशि
परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संचालित कर रहे शिक्षकों को अब तक स्टेशनरी खर्च की राशि नहीं मिली है, जिससे वे काफी परेशान हैं। शैक्षिक समन्वयकों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। हेडमास्टरों तक भी परीक्षा संचालन के लिए दी जाने वाली राशि नहीं पहुंची है।
कहां खर्च होना था पैसा
परीक्षा केंद्रों पर सील, गोंद, स्टेपलर, मोमबत्ती, पेन, पेपर और निरीक्षण पंजी जैसे सामानों के लिए स्टेशनरी खर्च दिया जाना था। यह पैसा छात्रों की संख्या के हिसाब से तय किया गया था—प्राइमरी छात्रों के लिए 2 रुपए और आठवीं के छात्रों के लिए 3 रुपए प्रति छात्र। सभी BEO को यह राशि भेजी गई थी, लेकिन ज्यादातर केंद्रों में पैसा नहीं पहुंचा।
परीक्षा खत्म, विवाद जारी
परीक्षा खत्म हो चुकी है, लेकिन खर्च की राशि अब तक कई शिक्षकों को नहीं मिली है। अब मूल्यांकन कार्य के लिए भी इसी तरह की राशि दी जाएगी, जिसको लेकर पहले से ही विवाद शुरू हो गया है। मामले की शिकायत पर जांच भी चल रही है।
जिम्मेदार कौन?
डीईओ अश्वनी कुमार भारद्वाज ने कहा कि छात्रों की संख्या के हिसाब से राशि सभी BEO को भेज दी गई थी। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो इसके लिए संबंधित BEO जिम्मेदार होंगे। सूत्रों के अनुसार, BEO कार्यालय में बैठे क्लर्क भी इस गड़बड़ी में शामिल हैं, जो हर काम के बदले पैसे की मांग करते हैं।
छोटी रकम में भी गड़बड़ी
यह भी चौंकाने वाली बात है कि एक से डेढ़ लाख रुपए वेतन पाने वाले शिक्षा अधिकारी 100 से 200 रुपए के स्टेशनरी खर्च में भी घोटाला कर रहे हैं। अकलतरा, पामगढ़ और नवागढ़ ब्लॉक इस विवाद में सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं। अधिकारी और बाबू एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
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