क्रिकेट में विकेटकीपर का गेंदबाजी करना बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन कई बार ऐसे खिलाड़ी भी होते हैं जो विकेटकीपर नहीं होते, फिर भी अपने पूरे इंटरनेशनल करियर में एक भी गेंद नहीं फेंकते। इनमें से कुछ खिलाड़ियों ने डोमेस्टिक क्रिकेट में बॉलिंग जरूर की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कभी मौका नहीं मिला। आइए जानते हैं ऐसे 5 नाम जिनका बल्ला तो खूब चला, लेकिन गेंद कभी हाथ से नहीं छूटी।
1. डेविड मिलर – साउथ अफ्रीका
साउथ अफ्रीका के धमाकेदार बल्लेबाज डेविड मिलर दुनिया के सबसे खतरनाक फिनिशर्स में गिने जाते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 300 से ज्यादा मैच खेले हैं और कई बार अपनी टीम को मुश्किल हालात से निकालकर जीत दिलाई है। डोमेस्टिक (फर्स्ट-क्लास) क्रिकेट में उन्होंने गेंदबाजी भी की है, लेकिन इंटरनेशनल स्तर पर उन्हें कभी बॉलिंग का मौका नहीं मिला।
2. अजिंक्य रहाणे – भारत
भारतीय टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज रह चुके अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और 8000 से ज्यादा रन बनाए हैं। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 3 विकेट भी झटके हैं, लेकिन इंटरनेशनल मैचों में उन्हें कभी गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला। रहाणे का खेल हमेशा तकनीकी और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है, लेकिन बॉलिंग चार्ट में उनका नाम खाली ही रहा।
3. उपुल थरंगा – श्रीलंका
श्रीलंका के पूर्व ओपनर उपुल थरंगा ने लंबे समय तक टीम के लिए पारी की शुरुआत की। वनडे में उनकी जोड़ी पहले सनथ जयसूर्या और बाद में तिलकरत्ने दिलशान के साथ काफी मशहूर रही। बैटिंग में उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं, लेकिन अपने पूरे इंटरनेशनल करियर में एक भी गेंद नहीं फेंकी।
4. इयोन मॉर्गन – इंग्लैंड
इंग्लैंड के विश्व कप विजेता कप्तान इयोन मॉर्गन ने अपने करियर में इंग्लैंड और आयरलैंड, दोनों के लिए क्रिकेट खेला है। उन्होंने कुल 379 इंटरनेशनल मैच खेले, लेकिन कभी गेंदबाजी नहीं की। वे सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले ऐसे नॉन-विकेटकीपर खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने पूरे करियर में एक भी गेंद नहीं फेंकी।
5. क्रेग इर्विन – जिम्बाब्वे
जिम्बाब्वे टीम के कप्तान क्रेग इर्विन 15 साल से इंटरनेशनल क्रिकेट में सक्रिय हैं। उन्होंने 30 टेस्ट, 128 वनडे और 71 टी20 मैच खेले हैं। डोमेस्टिक क्रिकेट में उन्होंने 4 विकेट लिए हैं, लेकिन इंटरनेशनल मैचों में उन्हें गेंदबाजी का मौका नहीं मिला।
ये पांचों खिलाड़ी बल्लेबाजी में तो माहिर थे और टीम के लिए अहम योगदान देते थे, लेकिन उनके इंटरनेशनल करियर का एक कोना हमेशा खाली रहा – गेंदबाजी का रिकॉर्ड। शायद यही वजह है कि क्रिकेट में कहा जाता है, हर खिलाड़ी की ताकत और जिम्मेदारी अलग होती है, और सबको हर भूमिका निभाने की जरूरत नहीं होती।
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