सीरिया में प्रभाव बढ़ाने की होड़ के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाल ही में इजरायली एयरस्ट्राइक्स के बाद तुर्की और इजरायल के लड़ाकू विमानों के बीच तनावपूर्ण मुठभेड़ हुई है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
क्या हुआ था शनिवार को?
शनिवार की शाम सीरिया के आसमान में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई जब इजरायल के फाइटर जेट्स ने दमिश्क और हमा के पास कई ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली विमानों के करीब तुर्की के लड़ाकू विमान भी उड़ान भरते नजर आए। हालांकि दोनों पक्षों के बीच कोई सीधा टकराव नहीं हुआ, लेकिन यह मुठभेड़ भविष्य की संभावित लड़ाई की ओर इशारा जरूर करती है।
क्या है इजरायल का मकसद?
इजरायल का दावा है कि वह सीरिया में आतंकी संगठनों तक हथियार न पहुंचने देने के लिए सैन्य ठिकानों पर हमले करता है। बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद से इजरायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई और अधिक तेज कर दी है। उनका फोकस ऐसे इलाकों पर है जो ईरान या हिज्बुल्लाह जैसे गुटों के कब्जे में जा सकते हैं।
तुर्की की भूमिका और प्रतिक्रिया
वहीं, तुर्की असद शासन के बाद बनी अंतरिम सरकार का समर्थन कर रहा है और उसने सीरिया में अपने सैन्य और हवाई सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के प्रयास तेज किए हैं। तुर्की चाह रहा है कि उसके सैनिक और हवाई रक्षा प्रणाली, विशेष रूप से T4 एयरबेस और हमा जैसे इलाकों में तैनात हों — जहां पहले इजरायली हमले हो चुके हैं। तुर्की ने इजरायल की हालिया कार्रवाइयों की निंदा करते हुए इन्हें क्षेत्रीय शांति के खिलाफ बताया है।
क्या बढ़ेगा संघर्ष?
इजरायल और तुर्की दोनों सीरिया में अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए सक्रिय हैं। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने सीधे तौर पर इजरायल पर सीरिया को अस्थिर करने का आरोप लगाया है। वहीं, इजरायल को तुर्की की सैन्य मौजूदगी से खतरा महसूस हो रहा है। इस बीच, सीरिया की जमीन पर दोनों शक्तियों की सक्रियता से टकराव की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है।
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