लंदन – यौन अपराधों को दोहराने से रोकने और जेलों की भीड़ कम करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार अब कुछ खास यौन अपराधियों पर “केमिकल कास्ट्रेशन” की नीति लागू करेगी, जिसके तहत दवाओं के माध्यम से उनकी यौन इच्छाओं को नियंत्रित किया जाएगा। न्याय मंत्री शबाना महमूद ने इस नई योजना की घोषणा करते हुए इसे “अपराध रोकथाम की दिशा में साहसिक कदम” बताया।
क्या है ‘केमिकल कास्ट्रेशन’?
इस प्रक्रिया में हार्मोन-संशोधित दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे यौन इच्छाओं में भारी कमी आती है। इसका उद्देश्य है ऐसे अपराधियों के व्यवहार को नियंत्रित करना जिनमें दोबारा अपराध करने की आशंका हो।
20 जेलों में योजना की शुरुआत
मंत्री शबाना महमूद के अनुसार, इस योजना की शुरुआत फिलहाल दो क्षेत्रों की 20 जेलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जाएगी। सरकार यह भी विचार कर रही है कि भविष्य में इस प्रक्रिया को कुछ अपराधों के लिए अनिवार्य बना दिया जाए।
अन्य देशों में भी अपनाया जा चुका है यह तरीका
जर्मनी और डेनमार्क जैसे देशों में यह प्रक्रिया स्वैच्छिक आधार पर वर्षों से उपयोग में है, जबकि पोलैंड में यह कुछ अपराधियों के लिए अनिवार्य की जा चुकी है। शोध बताते हैं कि इस उपचार से दोबारा अपराध की दर में 60% तक की गिरावट देखी गई है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू
लेबर पार्टी की मंत्री शबाना महमूद ने बीते वर्षों में जेल व्यवस्था की अनदेखी के लिए कंजर्वेटिव सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जेलों में जगह की भारी कमी के चलते सरकार को अब कठोर और अप्रचलित उपाय अपनाने पड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो पुलिस को गिरफ्तारी रोकनी पड़ सकती है।
अलग-अलग सिफारिशें भी पेश
केमिकल कास्ट्रेशन के अलावा समीक्षा रिपोर्ट में कई अन्य सुझाव भी दिए गए हैं:
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कम सजा पाने वाले विदेशी अपराधियों को निर्वासित करना
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12 महीने से कम की सजा हटाकर सामुदायिक सेवा देना
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अच्छे व्यवहार पर कैदियों की जल्दी रिहाई
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जजों को वैकल्पिक सजाएं देने की अधिक स्वतंत्रता
कंजर्वेटिव पार्टी का विरोध
कंजर्वेटिव न्याय प्रवक्ता रॉबर्ट जेनरिक ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इससे छोटे अपराधों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक टैग जैसे विकल्पों को भी असफल करार दिया।
ब्रिटेन की जेलों में भीड़ एक बड़ी चुनौती
ब्रिटेन में पिछले तीन दशकों में जेलों की आबादी लगभग दोगुनी हो चुकी है, जो अब 90,000 के करीब पहुंच गई है। हालांकि अपराध की कुल दर घटी है, लेकिन कठोर सजा नीति के कारण जेलों पर दबाव बढ़ा है।
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