विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर पाकिस्तान और आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक समुदाय, विशेषकर यूरोपीय देशों, के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए हैं। जर्मन मीडिया संस्था पोलिटिकेन को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने यूरोप द्वारा पाकिस्तान को दी गई निरंतर सहानुभूति और सैन्य समर्थन पर गहरी चिंता व्यक्त की।
जयशंकर ने कहा कि भारत 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ से जूझ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “आप लोग अभी जागे हैं, लेकिन हम तो पिछले 80 वर्षों से इस आतंकवाद को सहन कर रहे हैं।”
पश्चिम की भूमिका पर कटाक्ष
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने में पश्चिमी देशों की भूमिका कम नहीं रही है। जयशंकर के अनुसार, “पश्चिम ने वर्षों तक पाकिस्तान में सैन्य शासन का समर्थन किया, जबकि उसी दौरान भारत को लगातार सीमा पार हमलों का सामना करना पड़ा।”
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने लगातार इस बात को उजागर किया है कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना, विशेषकर उसकी सेना, कश्मीर और पूरे दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन देती रही है।
पाकिस्तान पर भरोसा संभव नहीं
उन्होंने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को 2004 में “प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी” (MNNA) का दर्जा दिए जाने को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने पूछा, “जो देश आतंकवादियों को पनाह देता रहा है, क्या उस पर इस तरह का भरोसा करना उचित है?” इस कदम पर भारत समेत कई देशों ने सवाल उठाए थे।
यूरोप दौरे पर विदेश मंत्री
जयशंकर इन दिनों नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की यात्रा पर हैं। बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात के बाद उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भारत आतंकवाद के विरुद्ध मजबूती से खड़ा है। हमें खुशी है कि जर्मनी इस संघर्ष में हमारे साथ खड़ा है। हम रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।”
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