AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी इन दिनों अल्जीरिया की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां वे एक सर्वदलीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने अल्जीरियाई स्वतंत्रता संग्राम के नायक अमीर अब्दुल कादिर की कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके नेतृत्व और साहस को याद किया।
ओवैसी ने उठाई पाकिस्तान की पोल, फिर पहुंचे अब्दुल कादिर की मजार
असदुद्दीन ओवैसी ने अल्जीरिया में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने क्षेत्रीय अस्थिरता और धार्मिक उग्रवाद पर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया। इसी यात्रा के अगले चरण में वे अल्जीरिया के एक ऐतिहासिक स्थल पहुंचे — अमीर अब्दुल कादिर की कब्र। वहां उन्होंने जियारत कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर भी उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
कौन थे अमीर अब्दुल कादिर?
अमीर अब्दुल कादिर 19वीं सदी के ऐसे नेतृत्वकर्ता थे जिन्होंने फ्रांसीसी औपनिवेशिक हमले के विरुद्ध अल्जीरिया में सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया। वे न केवल एक साहसी योद्धा थे, बल्कि एक गहरे धार्मिक और सूफी पृष्ठभूमि से आने वाले विद्वान भी थे। उन्होंने 1830 के दशक में अल्जीरिया की बर्बर और अरब जनजातियों को संगठित कर फ्रांसीसी सेना के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ी।
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1832 में उन्हें “अमीर अल-मुमिनिन” की उपाधि से सम्मानित किया गया — जिसका अर्थ होता है “विश्वास करने वालों का नेता”।
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उनकी धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और संयम ने उन्हें व्यापक रूप से सम्मानित नेता बना दिया, यहाँ तक कि उनके दुश्मन भी उनके चरित्र की सराहना करते थे।
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1860 में दमिश्क में हुए सांप्रदायिक संघर्ष के दौरान उन्होंने सैकड़ों ईसाई नागरिकों की जान बचाई, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति और सम्मान प्राप्त हुआ।
उपनिवेशवाद विरोध का प्रतीक
अब्दुल कादिर ने अपने नेतृत्व में अल्जीरिया में राष्ट्रीय चेतना को आकार दिया। उन्होंने न केवल सैन्य बलों से लड़ाई लड़ी, बल्कि जनजातियों के बीच एकता कायम कर फ्रांसीसी साम्राज्यवाद को चुनौती दी।
उनकी रणनीति, आदर्श और समर्पण आज भी उन्हें अल्जीरिया के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बनाते हैं।
ओवैसी की यात्रा का राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश
ओवैसी द्वारा अब्दुल कादिर को दी गई श्रद्धांजलि सिर्फ ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि वैश्विक इस्लामी नेतृत्व के उस पक्ष की ओर संकेत है जो न्याय, शांति और विद्वता पर आधारित रहा है।
इस यात्रा ने न केवल भारत-अल्जीरिया संबंधों में एक सांस्कृतिक पुल का काम किया है, बल्कि उपनिवेशवाद के विरुद्ध वैश्विक संघर्षों को भी नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाने का संदेश दिया है।
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