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कोरबा, छत्तीसगढ़। जिले में 16 जून से नया स्कूल सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन स्कूल बसों की फिटनेस जांच अब तक नहीं हुई है। परिवहन विभाग की लापरवाही से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। दूसरी ओर, बस संचालक अधिक किराया भी वसूल रहे हैं।
🚌 स्कूल बसों की फिटनेस जांच नहीं हुई
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कोरबा जिले में लगभग 300 निजी स्कूल हैं, जिनमें हजारों बच्चे पढ़ते हैं।
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इनमें से कई स्कूल पुरानी और खतरनाक बसें चला रहे हैं, जो सरकारी नियमों के खिलाफ हैं।
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हर साल स्कूल खुलने से पहले बसों की जांच होती है, लेकिन इस बार अब तक कोई जांच नहीं हुई है।
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सिर्फ 2-3 दिन बचे हैं, और अभी तक परिवहन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
⚠️ अनफिट बसों से बढ़ा खतरा
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कई स्कूल बसें पहले भी हादसों का शिकार हो चुकी हैं।
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इन बसों में सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस, फर्स्ट एड किट, अग्निशमन यंत्र जैसी जरूरी चीजें नहीं हैं।
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बसों में तीन पाइप वाली खिड़की, पीला रंग, स्पीड गवर्नर, और चालक का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं है।
💰 अधिक किराया वसूला जा रहा है
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सरकार ने स्कूल बसों पर कर में छूट दी है ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
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लेकिन कई स्कूल संचालक इसका फायदा उठाकर कम दूरी के लिए भी अधिक किराया वसूल रहे हैं।
👧 बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
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नियमों के अनुसार बच्चों की सुरक्षा के लिए हर साल बसों की फिटनेस जांच अनिवार्य है।
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लेकिन इस बार न जांच हुई, न सख्ती दिखाई गई, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
निष्कर्ष:
स्कूल खुलने को कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक स्कूल बसों की जांच नहीं की गई, और अभिभावकों से ज्यादा किराया भी वसूला जा रहा है। प्रशासन को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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