नई दिल्ली/निकोसिया — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा ऐसे समय हो रही है जब इजरायल और ईरान के बीच टकराव और भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते भूमध्यसागरीय क्षेत्र में भू-राजनीतिक बदलाव तेज़ी से हो रहे हैं। इस यात्रा को न केवल राजनयिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में भी एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत, साइप्रस और इजरायल का नया त्रिकोण
भारत और इजरायल के गहरे सामरिक संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। वहीं, साइप्रस लंबे समय से कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दों पर भारत के पक्ष में खड़ा रहा है। 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण से लेकर हालिया क्षेत्रीय संघर्षों तक, साइप्रस ने हमेशा भारत के प्रति समर्थन दर्शाया है।
इसी बीच एक उल्लेखनीय घटनाक्रम में, इजरायल ने ईरान पर हमले के बाद अपने नागरिक विमानों को सुरक्षा के मद्देनजर साइप्रस भेज दिया, जबकि अपने सैन्य विमानों को ग्रीस में शिफ्ट किया। यह घटनाएं यह दिखाती हैं कि इस क्षेत्र में एक नया रणनीतिक नेटवर्क उभर रहा है जिसमें भारत, इजरायल, ग्रीस और साइप्रस शामिल हैं।
तुर्किए और साइप्रस का पुराना विवाद और भारत की भूमिका
साइप्रस एक द्वीपीय राष्ट्र है जहां ग्रीक और तुर्क मूल के समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। 1974 के तख्तापलट और तुर्की के हस्तक्षेप के बाद देश दो भागों में बंट गया। ग्रीक साइप्रस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है जबकि तुर्क-साइप्रस को केवल तुर्किए समर्थन देता है।
भारत का झुकाव हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के आधार पर वैध साइप्रस सरकार के पक्ष में रहा है। अब जब भारत के रिश्ते तुर्किए से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा राजनयिक संतुलन के बजाय रणनीतिक पक्षधरता की ओर इशारा करती है।
ऑपरेशन सिंदूर और इजरायल-भारत रक्षा सहयोग
हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने इजरायल के ड्रोन्स का प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया था। ईरान पर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले पीएम मोदी से बात की थी — यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा और संवाद की गहराई कितनी मजबूत है।
तुर्किए और पाकिस्तान की संयुक्त भूमिका
22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और तुर्किए के नेताओं की मुस्कराती तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का विषय बनी थीं। इस बीच पाकिस्तान ने तुर्किए से ड्रोन की बड़ी खेप मंगाकर भारत के खिलाफ उनका इस्तेमाल किया, जिसे भारतीय वायु सुरक्षा ने विफल कर दिया।
इसके बाद भारत ने तुर्किए की एविएशन कंपनी से करार रद्द कर दिया और भारतीय ट्रैवल सेक्टर में तुर्किए का बहिष्कार भी देखने को मिल रहा है।
पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा: एक रणनीतिक संकेत
इस माहौल में पीएम मोदी की 15-16 जून को होने वाली साइप्रस यात्रा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि यह भारत के भू-राजनीतिक दिशा-निर्देशों की स्पष्ट घोषणा है। तुर्की के कट्टरपंथी गठजोड़ और पाकिस्तान के साथ उसके सहयोग को देखते हुए, भारत अब भूमध्यसागर क्षेत्र में विश्वसनीय और संतुलित भागीदारों की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
ईरान-इजरायल युद्ध, भारत-पाक संघर्ष और तुर्किए की भूमिका के बीच प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा एक संतुलित, सशक्त और रणनीतिक भारत की छवि को दर्शाती है। इस यात्रा से यह स्पष्ट है कि भारत अब अपनी विदेश नीति में केवल तटस्थता नहीं, बल्कि साफ-सुथरी रणनीतिक प्राथमिकताओं को तरजीह दे रहा है।
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