सिलिकॉन वैली:
मार्क ज़ुकरबर्ग और उनकी कंपनी Meta (पूर्व में Facebook) ने जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में पिछड़ने की भरपाई के लिए शीर्ष AI प्रतिभाओं पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। हालांकि, इस खर्च के नतीजों को लेकर निवेशकों और विशेषज्ञों के बीच संदेह है।
OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में कहा कि Meta ने उनके इंजीनियरों को लुभाने के लिए 100 मिलियन डॉलर तक के बोनस ऑफर किए हैं। कुछ OpenAI कर्मचारी reportedly Meta में शामिल भी हो गए हैं, जिनमें Scale AI के पूर्व CEO अलेक्जेंडर वांग भी शामिल हैं।
Meta और Scale AI की डील
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Meta ने जून के मध्य में Scale AI में 49% हिस्सेदारी खरीदने के लिए $14 बिलियन से अधिक खर्च किए।
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इस सौदे के तहत अलेक्जेंडर वांग Meta में शामिल हुए, जहां वे कंपनी की “सुपरइंटेलिजेंस” परियोजना पर काम करेंगे।
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Scale AI उन कंपनियों, सरकारों और रिसर्च लैब्स के लिए डेटा लेबलिंग करता है जो अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करते हैं।
Meta के प्रवक्ता ने पुष्टि की:
“हमने Scale AI के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी और निवेश को अंतिम रूप दे दिया है।”
Meta की सुपरइंटेलिजेंस योजना क्या है?
Meta नए भर्ती किए गए AI टैलेंट को एक नई टीम में शामिल कर रहा है, जिसका लक्ष्य है:
“ऐसे AI सिस्टम बनाना जो मानवों से अधिक समझदारी और सोचने की क्षमता रखें।”
Meta का Llama मॉडल अभी तक OpenAI, Anthropic और Google जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कोडिंग जैसी क्षमताओं में पीछे है। इसीलिए Meta अब बाहर से टैलेंट लाकर अपने सिस्टम को बेहतर करने की कोशिश कर रहा है।
“भाड़े के सिपाही” और लंबी लड़ाई
तकनीकी ब्लॉगर ज्वी मोशोविट्ज़ ने कहा:
“Meta ने देर से शुरुआत की है, और ज़ुकरबर्ग को अब टैलेंट को लुभाना ही पड़ेगा। लेकिन यह भरोसा नहीं है कि इतना खर्च आखिरकार सफल साबित होगा।”
वह कहते हैं कि “भाड़े के लोगों पर आधारित रणनीति (pure mercenary approach)” जोखिम भरी है – खासकर तब जब कंपनी के पास ऐसे प्रोडक्ट्स हों जिन पर खुद कर्मचारी भी काम नहीं करना चाहते।
निवेशकों की चिंता:
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Meta का शेयर मूल्य रिकॉर्ड स्तर के करीब है और कंपनी का मूल्य लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर हो गया है।
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लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि Meta का फंड मैनेजमेंट और खर्च की निगरानी कमजोर हो गई है।
Baird के रणनीतिकार टेड मॉर्टनसन के अनुसार:
“इस समय Meta पर कोई चेक और बैलेंस नहीं है – ज़ुकरबर्ग जो चाहें कर सकते हैं।”
Meta की योजना है कि AI की मदद से ऑनलाइन विज्ञापन को अधिक सटीक और कुशल बनाया जाए – जिससे ब्रांड्स को एजेंसियों की ज़रूरत न पड़े।
Meta का भविष्य क्या हो सकता है?
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CFRA के एनालिस्ट एंजेलो ज़िनो कहते हैं कि टैलेंट पर निवेश लंबी अवधि के लिए जरूरी है, भले ही उससे तात्कालिक लाभ न दिखे।
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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ज़ुकरबर्ग संभवतः Llama मॉडल से हटकर किसी प्रतिस्पर्धी मॉडल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेहमत कनायाज़ मानते हैं कि:
“Meta जैसी कंपनियां जो सबसे शक्तिशाली LLM नहीं बनातीं, वे भी तब तक सफल हो सकती हैं जब तक उनके मॉडल विशिष्ट जरूरतों के अनुसार अच्छा प्रदर्शन करें।”
निष्कर्ष:
Meta की AI रेस में भागीदारी बेहद आक्रामक हो चुकी है। टैलेंट हायरिंग और निवेश का तरीका महत्वाकांक्षी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर दिखने में समय लगेगा – और इस बीच खर्च की बढ़ती गति चिंता का विषय बनी हुई है।
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