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बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद आरजेडी में सन्नाटा और नाराजगी बढ़ गई है। मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी के चुनाव हार के पीछे तीन जिलों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए और तेजस्वी यादव के फैसलों को लेकर पार्टी नेतृत्व पर हमला बोला।
हार की वजह
भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी ने चुनाव में हार इसलिए झेली, क्योंकि जमीनी कार्यकर्ताओं और योग्य नेताओं की अनदेखी की गई।
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वर्षों से पार्टी में काम करने वालों का टिकट काट दिया गया।
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कमजोर और बाहरी उम्मीदवारों को मौका दिया गया।
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चुनावी रणनीति में गंभीर चूक हुई, जिससे पार्टी 2020 में मिली 75 सीटों से घटकर 2025 में केवल 25 सीटों पर सिमट गई।
पार्टी में असंतोष
भाई वीरेंद्र ने कहा कि तीन जिलों – कैमूर, रोहतास और बक्सर की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को दी गई थी और ये तीनों जिलें “बेच दिए गए।”
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बक्सर से पार्टी सिर्फ एक सीट ही जीत पाई।
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उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उनके बच्चों पर निशाना साधा।
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उनका कहना है कि ऐसे नेता जो कई जिलों को अपने नियंत्रण में रखते हैं, भविष्य में किसी भी दल के लिए नुकसानदेह साबित होंगे।
टिकट कटने पर नाराजगी
भाई वीरेंद्र ने विजय मंडल का टिकट कटने पर भी नाराजगी जताई।
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उन्होंने कहा कि अगर यादव को ही टिकट देना था तो विजय मंडल में क्या कमी थी।
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बाहरी लोगों को टिकट देने का फैसला उनके समझ से परे है।
तेजस्वी की चुप्पी पर सवाल
पटना के गर्ल्स हॉस्टल प्रकरण के बाद तेजस्वी यादव ने कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। उनकी चुप्पी पर पार्टी के अंदर और बाहर सवाल उठ रहे हैं।
भाई वीरेंद्र का कहना है कि वे अपनी बात बेबाकी और पूरी जिम्मेदारी के साथ रख रहे हैं और इस पर अडिग हैं।
अगर आप चाहें तो मैं इसे और अधिक छोटा और आसानी से समझ में आने वाला संस्करण भी बना दूँ, जो सिर्फ मुख्य बातें बताए।
क्या मैं वह बनाऊँ?
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