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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का फ्रेमवर्क सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल की जगह वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया है। यह तेल अप्रैल महीने तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि भारत रूसी तेल की खरीद कम कर वेनेजुएला की ओर रुख करेगा।
वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनेजुएला में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद वहां के तेल कारोबार पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ गया है। इसी के चलते भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए रूसी तेल की जगह वेनेजुएला के तेल को चुना है।
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत की तेल कंपनियां अब रूसी तेल की खरीद से जुड़ी परेशानियों से बचना चाहती हैं और इसलिए वेनेजुएला से तेल मंगाया जा रहा है।
IOC और HPCL ने मिलकर किया सौदा
इस सौदे में
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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने करीब 15 लाख बैरल,
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हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने करीब 5 लाख बैरल
वेनेजुएलाई कच्चा तेल खरीदा है।
यह तेल एक बड़े तेल टैंकर के जरिए अप्रैल के मध्य तक भारत पहुंच सकता है। हालांकि, समझौता गोपनीय होने के कारण कंपनियों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
HPCL ने पहली बार खरीदा वेनेजुएलाई तेल
रिपोर्ट के अनुसार, IOC पहले भी साल 2024 में वेनेजुएला के तेल की रिफाइनिंग कर चुका है, लेकिन HPCL ने पहली बार वेनेजुएलाई कच्चा तेल खरीदा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत द्वारा तेल आयात में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके, खासकर रूसी तेल पर।
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