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संपादक: Neeraj Parwani
NEET में सेना जैसी सुरक्षा, CBSE 12वीं की मार्किंग पर सवाल; बड़े एग्जाम बार-बार विवादों में क्यों?
Breaking News: देश में बड़े एग्जाम को लेकर भरोसे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ NEET जैसी परीक्षा में सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम और सेना जैसी निगरानी की जरूरत पड़ रही है, तो दूसरी तरफ CBSE 12वीं की मार्किंग में गलती जैसे मामले छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लाखों छात्रों का भविष्य इन परीक्षाओं पर टिका होता है, तो फिर परीक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों दिखती है? कभी पेपर लीक के आरोप, कभी गलत मार्किंग, कभी रिजल्ट में गड़बड़ी और कभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा को लेकर सवाल—ये सभी घटनाएं सिस्टम की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालती हैं।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता सबसे जरूरी है। लेकिन जब पेपर लीक, नकल या सुरक्षा चूक जैसे आरोप सामने आते हैं, तो छात्रों की मेहनत और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
वहीं CBSE 12वीं की मार्किंग में गलती जैसी खबरें भी चिंता का विषय हैं। बोर्ड परीक्षा में एक-एक अंक छात्र के कॉलेज एडमिशन, स्कॉलरशिप और करियर की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में अगर मूल्यांकन में गड़बड़ी होती है, तो इसका असर सीधे छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े एग्जाम में समस्या सिर्फ सुरक्षा की नहीं, बल्कि पूरे मैनेजमेंट सिस्टम की है। परीक्षा प्रक्रिया, पेपर सेटिंग, डिजिटल सुरक्षा, मूल्यांकन, डेटा हैंडलिंग और रिजल्ट पब्लिशिंग—हर स्तर पर मजबूत निगरानी और जवाबदेही की जरूरत है।
छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि सरकार और परीक्षा एजेंसियां सिर्फ जांच का भरोसा न दें, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें गलती की गुंजाइश ही कम से कम हो। तकनीक का इस्तेमाल हो, लेकिन उसके साथ मजबूत मानवीय निगरानी भी जरूरी है।
अब सवाल बड़ा है—क्या देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सिर्फ नए नियम काफी होंगे, या पूरे सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है?
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