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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पीएससी घोटाले के आरोपी और पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। यह फैसला जस्टिस बी.डी. गुरु की सिंगल बेंच ने सुनाया। इससे पहले 17 अप्रैल को कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सीबीआई ने की थी गिरफ्तारी
सीबीआई ने नवंबर 2023 में सोनवानी को गिरफ्तार किया था। उस समय वह सरगुजा से मैनपाट स्थित अपने फार्म हाउस जा रहे थे, जिसे कथित रूप से उन्होंने अवैध कमाई से बनवाया था।
क्यों हुई जमानत खारिज?
सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील बी. गोपाकुमार ने बताया कि यह मामला गंभीर है और सोनवानी की जमानत नहीं दी जानी चाहिए। जांच में सामने आया कि पीएससी 2021 में चुने गए कई अभ्यर्थियों के घरों में छापेमारी हुई थी। वहां से 300 से ज्यादा किताबें, नोटबुक, मोबाइल, लैपटॉप, डायरी जैसी चीजें जब्त की गईं।
रिश्तेदारों को बनाया अफसर
जांच में पता चला कि सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने में मदद की। इसमें उनके भतीजे, भाभी, भाई की बहू, बहन की बेटी शामिल हैं। इसके अलावा कई राजनीतिक और प्रशासनिक परिवारों के बच्चों का भी चयन हुआ, जिनमें पीएससी सचिव, राज्यपाल के सचिव, डीआईजी, मंत्री और कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदार शामिल हैं।
सीबीआई की गहरी जांच
सीबीआई ने अभ्यर्थियों और पीएससी अधिकारियों की पांच साल की कॉल डिटेल, लोकेशन, और बैंक खातों की गहन जांच की। कुछ अभ्यर्थियों के घर से लीक प्रश्नपत्रों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए।
नतीजा:
इन सब सबूतों के आधार पर कोर्ट ने सोनवानी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। ग्रामीणों और राज्य के लोगों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा है।
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