मॉस्को/कुर्स्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को युद्धग्रस्त कुर्स्क क्षेत्र का दौरा किया। यह दौरा यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष के बीच विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह पहला मौका है जब पुतिन ने इस इलाके में कदम रखा है, जिसे हाल ही में रूसी बलों ने दोबारा अपने नियंत्रण में लिया है।
क्रेमलिन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने सैन्य अधिकारियों, स्वयंसेवी समूहों और क्षेत्रीय प्रशासन के प्रमुख लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि रूस की सेना अब अंतिम चरण में है और शेष यूक्रेनी लड़ाकों को भी जल्द ही इलाके से बाहर कर दिया जाएगा।
परमाणु संयंत्र का निरीक्षण और स्थानीय संवाद
पुतिन ने कुर्स्क-2 परमाणु ऊर्जा संयंत्र का दौरा किया और वहां की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी सर्गेई किरियेंको और कुर्स्क के कार्यवाहक गवर्नर अलेक्जेंडर खिंश्टीन भी मौजूद थे। पुतिन ने स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों से भी बातचीत की और नागरिक सहभागिता की सराहना की।
रूसी सेना को स्पष्ट निर्देश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने सेना को सख्त निर्देश दिए कि कुर्स्क क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए और शेष यूक्रेनी सैनिकों को तुरंत खदेड़ दिया जाए। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल के सैन्य अभियानों में रूस ने 24 बस्तियों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया है और लगभग 1,100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र फिर से अपने कब्जे में लिया है।
यूक्रेनी सेना पर तीखा हमला
पुतिन ने यूक्रेनी सैनिकों को “आतंकवादी” करार देते हुए चेतावनी दी कि उन पर रूसी कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी भाड़े के सैनिकों को अंतरराष्ट्रीय नियमों, विशेषकर जिनेवा कन्वेंशन, के तहत कोई संरक्षण नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में यूक्रेन ने कुर्स्क क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया था, जिसे रूस के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर सीमा उल्लंघन माना गया। अप्रैल 2025 में रूस ने दावा किया कि उसने इस क्षेत्र को पूरी तरह से फिर से नियंत्रण में ले लिया है।
दौरे के निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा न केवल सैन्य सफलता को उजागर करने के लिए है, बल्कि इसका उद्देश्य रूस के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देना भी है कि क्षेत्र में अब स्थिरता लौट रही है। दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिमी देशों द्वारा युद्धविराम की कोशिशें तेज की जा रही हैं।
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