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सारांश
उत्तर प्रदेश में कैबिनेट के फैसले ने डीजीपी पद के लिए कई आईपीएस अफसरों की उम्मीदों को बदल दिया है। प्रशांत कुमार, जो 16 अफसरों को पीछे छोड़ कार्यवाहक डीजीपी बने थे, को अब स्थायी डीजीपी बनाए जाने की संभावना है। इससे अन्य अफसरों को डीजीपी बनने का मौका नहीं मिल पाएगा।
विस्तार
डीजीपी पद पर नियुक्ति को लेकर यूपी कैबिनेट के फैसले के बाद कई आईपीएस अफसरों की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार को स्थायी करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे उन्हें दो साल तक डीजीपी के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है। इस बदलाव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति 30 मई 2025 के बजाय 31 जनवरी 2026 को होगी, जिससे उन्हें अतिरिक्त आठ महीने का समय मिलेगा।
भाजपा सरकार बनने के बाद यूपी में अब तक 8 डीजीपी नियुक्त हो चुके हैं, जिनमें से चार स्थायी रहे हैं। ओपी सिंह सबसे लंबे समय तक दो साल डीजीपी के पद पर रहे। अब प्रशांत कुमार को भी दो साल के लिए डीजीपी पद पर स्थायी करने का रास्ता साफ हो रहा है। इससे कई आईपीएस अफसर, जिनमें पीवी रामाशास्त्री, आदित्य मिश्रा, संदीप सालुंके, दलजीत सिंह चौधरी, बिजय कुमार मौर्या और अन्य शामिल हैं, बिना डीजीपी बने ही सेवानिवृत्त हो सकते हैं। प्रशांत कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद जुलाई 2026 के बाद ही नए डीजीपी का चयन होगा।
देश के 9 राज्यों में कार्यवाहक डीजीपी
उत्तर प्रदेश समेत आठ अन्य राज्यों जैसे उत्तराखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर में भी कार्यवाहक डीजीपी तैनात किए गए थे। जम्मू-कश्मीर में डीजीपी आरआर स्वैन को केंद्र सरकार ने स्थायी किया था, पर बाकी राज्यों में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त करने पर नोटिस जारी किया था। यूपी सरकार ने इस पर जवाब दाखिल करने से पहले डीजीपी की नियुक्ति के नियम बनाकर स्थायी डीजीपी तैनात करने का रास्ता साफ कर लिया है, जिससे संघ लोक सेवा आयोग के साथ चली आ रही खींचतान भी समाप्त हो गई।
16 अफसरों को किया था सुपरसीड
31 जनवरी 2024 को विजय कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रशांत कुमार को 16 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सुपरसीड कर कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था।
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