तेहरान:
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने शुक्रवार को एक टेलीविज़न संबोधन में अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ “राजनीतिक और सैन्य विजय” का दावा किया। यह बयान उस युद्धविराम के बाद आया है जो अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई — क़तर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमले — के बाद लागू हुआ।
खामेनेई ने कहा,
“अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालिया बयान में कहा कि ईरान को आत्मसमर्पण करना चाहिए। लेकिन अब यह मामला केवल परमाणु कार्यक्रम या संवर्धन (enrichment) का नहीं रहा — यह हमारी संप्रभुता और आत्मसम्मान के समर्पण की बात है। और मैं स्पष्ट कहता हूं: यह कभी नहीं होगा।”
“हम झुकेंगे नहीं, हर हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी”
खामेनेई ने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य या राजनैतिक दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और यदि भविष्य में कोई आक्रामकता होती है, तो उसका जवाब “कठोर और भारी” होगा।
“ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा — न अब, न भविष्य में। कोई भी नया हमला होगा तो उसकी कीमत भारी चुकानी पड़ेगी,” उन्होंने चेताया।
ईरान-इज़राइल संघर्ष और अमेरिका की भूमिका
हालिया संघर्ष में अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने क़तर में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल दागी, जिससे तनाव और बढ़ गया था।
हालांकि इन हमलों के बाद एक सीमित युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन राजनीतिक बयानबाज़ी अभी भी तेज़ बनी हुई है।
“विजय हमारी है” – खामेनेई
अपने भाषण में खामेनेई ने इस टकराव को ईरान के लिए एक “रणनीतिक जीत” बताया और कहा कि पश्चिमी शक्तियों ने यह जान लिया है कि ईरान को डराया नहीं जा सकता।
“हमने एक वैश्विक शक्ति को उसकी भाषा में जवाब दिया। यह एक राजनीतिक तमाचा था — अमेरिका के मुंह पर,” उन्होंने कहा।
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