अमेरिकी सरकार ने सऊदी अरब को अत्याधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइलें बेचने की प्रारंभिक मंजूरी दे दी है। इस सौदे की अनुमानित कीमत 3.5 अरब डॉलर (करीब 29 हजार करोड़ रुपये) बताई जा रही है। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी सऊदी यात्रा से पहले सामने आया है, जिसे वॉशिंगटन और रियाद के बीच रणनीतिक रिश्तों को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम क़दम माना जा रहा है।
इस डील के तहत सऊदी अरब को 1,000 AIM-120C-8 एडवांस्ड मिसाइलें, उनके गाइडेंस सिस्टम और तकनीकी सहयोग मिलेगा। इन मिसाइलों का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनी RTX कॉर्प द्वारा एरिज़ोना के टक्सन शहर में किया जाएगा।
अमेरिकी रक्षा सुरक्षा एजेंसी का बयान
अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने इस प्रस्ताव को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। एजेंसी के अनुसार, यह सौदा अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप है। साथ ही, यह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक साबित होगा।
अभी कांग्रेस की मंजूरी बाकी
हालांकि यह डील अभी अंतिम नहीं हुई है। अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी भी बड़े रक्षा सौदे को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक होता है। सांसद इस प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे और यदि चाहें तो इसे रोक भी सकते हैं।
सऊदी अरब को लेकर अमेरिका में विरोध
गौरतलब है कि सऊदी अरब को लेकर अमेरिकी राजनीति में विरोध के स्वर पहले भी उठ चुके हैं। 2015 में यमन युद्ध और 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सऊदी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे थे। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में इस हत्या के लिए सीधे तौर पर सऊदी क्राउन प्रिंस को जिम्मेदार ठहराया गया, हालांकि रियाद इस आरोप से इनकार करता है।
ट्रंप और सऊदी अरब के रिश्ते
डोनाल्ड ट्रंप के खाड़ी देशों से घनिष्ठ संबंध जगजाहिर हैं। उनके राष्ट्रपति रहते हुए 2017 में पहली विदेश यात्रा भी सऊदी अरब ही थी। ट्रंप की रियल एस्टेट फर्म के खाड़ी क्षेत्र में कारोबारी हित भी रहे हैं। अब 2025 में एक बार फिर उनकी विदेश यात्रा की शुरुआत रियाद से होने जा रही है, जिससे यह सौदा और भी अधिक राजनीतिक महत्व पा गया है।
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