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अलीगढ़ के बनियापाड़ा मोहल्ले में 12 मंदिर हैं, जिनमें गोविंद जी, लक्ष्मण जी, बांकेबिहारी, सत्यनारायण जी, पथवारी माता, शनिदेव और तीन देवी मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा यहां पांच प्राचीन कुएं भी हैं, लेकिन इन कुओं में अब पानी नहीं है। बावजूद इसके, इस इलाके में विवाह और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए पूजा होती है।
बनियापाड़ा, जो कि थाना देहलीगेट क्षेत्र के अंतर्गत आता है, एक संवेदनशील मोहल्ला है जहां से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं। मोहल्ले में करीब 250 परिवार हैं, जिनमें से लगभग एक दर्जन परिवार घर छोड़कर जा चुके हैं। इन परिवारों के घर अब बंद पड़े हैं।
मोहल्ले से बाहर जाने के लिए पांच प्रमुख रास्ते हैं, जिनमें हाथी वाला पुल, श्याम चौक, ऊपरकोट, शीशा मस्जिद और चिराग चियान प्रमुख हैं। ये इलाके मुस्लिम बहुल हैं। यहां अक्सर सांप्रदायिक तनाव और दंगे होते रहे हैं, जिसके कारण कई परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। पहले इस मोहल्ले में मुख्यतः वैश्य समाज के लोग रहते थे, कुछ ब्राह्मण और अन्य समाज के लोग भी थे।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कुछ मुस्लिम परिवार यहां बसने आए हैं। मोहल्ले के निवासी मोहन लाल ने बताया कि आस्था के कारण लोग यहां बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन करने आते हैं, और इस मोहल्ले को अलीगढ़ का वृंदावन भी कहा जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कई हिंदू परिवार मोहल्ला छोड़कर शहर के अन्य इलाकों में बस गए हैं।
बनियापाड़ा के पास स्थित मोहल्ला टनटनपाड़ा में भी एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो अब वीरान पड़ा हुआ है। पहले यहां वैश्य समाज की घनी आबादी थी, लेकिन अब यहां कोई हिंदू परिवार नहीं बचा। मंदिर की देखरेख करने वाला कोई नहीं है, और पुजारी भी नहीं है। मंदिर का भवन बहुत सुंदर है, लेकिन पूजा के लिए चाबी एक हिंदू परिवार के पास रहती है।
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