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असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को “असम का जिन्ना” कहकर हमला बोला है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया आरोप
गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा नेताओं को “हिंदू सर्टिफिकेट” बांटने का काम कर रहे हैं, जो गलत है। गोगोई ने कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करना सही नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह हिंदू धर्म पर खुली बहस के लिए तैयार हैं, ताकि यह साफ हो सके कि असली हिंदू कौन है। साथ ही उन्होंने गाय तस्करी से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद बढ़ा विवाद
यह बयान उस समय आया है जब पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और 22 फरवरी 2026 को भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सरमा ने बोरा के इस कदम को कांग्रेस के अंदर असहमति से जोड़ा था।
गोगोई ने बोरा के भाजपा में जाने को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जो नेता भाजपा में जाते हैं, वे राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई नेताओं का राजनीतिक प्रभाव कम हो गया है।
बोरा का पलटवार
इस्तीफे के बाद भूपेन बोरा ने भी गोगोई पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि असम कांग्रेस में अब गोगोई का पूरा नियंत्रण नहीं है। बोरा ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्होंने बताया कि हाल की बैठकों में भी मतभेद सामने आए थे, जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
असम की राजनीति में इन बयानों के बाद माहौल और भी गर्म हो गया है, और आने वाले चुनावों से पहले यह विवाद और बढ़ सकता है।
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