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आंद्रेई कोजलोव की पेंटिंग्स में झलकता है हमास की कैद का दर्द, अब कर रहे हैं अपनी कहानी बयां

न्यूयॉर्क: कुछ अनुभव शब्दों से नहीं, रंगों से बयां होते हैं। हमास की कैद से रिहा होने वाले आंद्रेई कोजलोव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसे उन्होंने कैनवास पर उतार कर दुनिया के सामने लाने का रास्ता चुना। उनके न्यूयॉर्क स्थित स्टूडियो में रखी पेंटिंग्स उन आठ महीनों की गवाही देती हैं, जो उन्होंने एक बंदी के रूप में गुजारे थे।

कोजलोव की कलाकृतियों में गहरे रंगों की छाया है — दर्द, क्रोध और टूटन साफ नजर आती है। लेकिन साथ ही उनमें जीवित लौटने की आशा और अंदरूनी शक्ति की झलक भी है। आज वह आज़ाद हैं, लेकिन उनके मुताबिक, “जब आप अंधेरे में होते हैं, तो एक छोटी सी रौशनी भी उम्मीद बन जाती है।”

हमेशा जुड़ी रहेगी ‘बंधक’ की पहचान

रिहाई के करीब एक साल बाद कोजलोव सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कहते हैं कि “लोग मुझे हमेशा एक बंधक के रूप में ही देखेंगे।” उनका अपहरण 7 अक्टूबर 2023 को एक संगीत महोत्सव के दौरान किया गया था — एक ऐसा दिन जिसे इज़रायल के इतिहास में सबसे घातक माना जाता है।

रूस से इज़रायल तक का सफर

सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) में पले-बढ़े आंद्रेई को घूमने-फिरने और नई जगहें तलाशने का शौक था। सेना में एक साल की अनिवार्य सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने इज़रायल में बसने का फैसला किया। अगस्त 2022 में वे इज़रायल आए और एक स्थानीय कंपनी में काम करने लगे। लेकिन उनका जीवन एक साल से भी कम समय में पूरी तरह बदल गया।

“कैद के दिन थे असली नरक”

कैद की शुरुआत उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। उन्हें लगातार अलग-अलग स्थानों पर रखा गया, जहाँ 20-25 हमलावरों की निगरानी में रहना पड़ता था। कुछ गार्ड झूठी सहानुभूति दिखाते, तो कुछ अमानवीय व्यवहार करते। फफूंद लगी चटाई, गीले गद्दे और घुटन भरे कमरों में उन्होंने रातें बिताईं। महीनों बाद, उन्हें एक पेंसिल और एक पतली नोटबुक दी गई, जिसने उन्हें अपनी भावनाएं ज़ाहिर करने का जरिया दिया।

ऑपरेशन के दौरान मिली रिहाई

247 दिनों की कैद के बाद इज़रायली सेना ने एक साहसिक ऑपरेशन में कोजलोव और तीन अन्य बंधकों को नुसेरात शरणार्थी शिविर से छुड़ाया। बाहर निकलते ही उन्हें पहली बार सूरज की रौशनी महसूस हुई। हाथ में कोल्ड ड्रिंक और होंठों पर सिगरेट थी — एक छोटा लेकिन प्रतीकात्मक क्षण उनकी आज़ादी का।

रिहाई के बाद उन्होंने कुछ समय इज़रायल में बिताया और फिर अमेरिका चले आए। अब वह न्यूयॉर्क में हडसन नदी के पास एक स्टूडियो में रहते हैं, जहाँ उनकी पेंटिंग्स की एक खास प्रदर्शनी की तैयारी हो रही है। ऐक्रेलिक से बनी इन कृतियों में उनका पूरा सफर — अपहरण, संघर्ष और मुक्ति — एक कलाकार की नजर से देखने को मिलेगा।

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