हर साल कई बच्चे जन्म के साथ ही दिल की किसी न किसी समस्या के साथ पैदा होते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 1000 जीवित शिशुओं में से 8 से 10 बच्चों को जन्मजात हृदय रोग हो सकता है। अगर इस बीमारी की समय पर पहचान न हो, तो यह बच्चे की जान के लिए खतरा बन सकती है।
विश्व जन्मजात हृदय दोष जागरूकता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि बच्चों में दिखने वाले शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच करवाएं।
क्या होता है जन्मजात हृदय दोष?
जन्मजात हृदय दोष वह स्थिति है, जिसमें बच्चे का दिल जन्म से ही पूरी तरह विकसित नहीं होता। कई बार इसके लक्षण तुरंत नजर नहीं आते, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर हो जाती है। यह बच्चों में होने वाली सबसे सामान्य जन्मजात बीमारियों में से एक है।
हृदय रोग के प्रकार
1. सायनोटिक हृदय रोग (ब्लू बेबी दोष)
इसमें बच्चे के शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे त्वचा और होंठ नीले पड़ सकते हैं।
2. एसियानोटिक हृदय रोग
इसमें रक्त में ऑक्सीजन तो पर्याप्त होती है, लेकिन उसका प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता। दिल में छेद, वाल्व की खराबी या बड़ी रक्त वाहिकाओं की समस्या इसके कारण हो सकते हैं।
दिल के निचले हिस्से (वेंट्रिकुलर सेप्टम) में छेद होना सबसे आम समस्या मानी जाती है। सही इलाज से बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है।
ये 9 लक्षण हो सकते हैं संकेत
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सांस लेने में तकलीफ
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दिल की धड़कन तेज होना
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वजन का ठीक से न बढ़ना
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फेफड़ों में बार-बार संक्रमण
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बेहोशी आना
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दूध पीने में परेशानी
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माथे पर ज्यादा पसीना आना
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ज्यादा चिड़चिड़ापन
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हाथ-पैर और नाखूनों का नीला पड़ना
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
समय पर जांच है जरूरी
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, जन्म के बाद स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है। समय पर उपचार मिलने से बच्चे की जीवन गुणवत्ता बेहतर रहती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत
परिवार को इस बीमारी के बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। आज आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ इलाज की मदद से जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चे भी स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
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