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ईरानी मिसाइल हमले के बाद इसराइल का तीखा संदेश: “ख़ामेनेई को अब नहीं छोड़ा जा सकता”

20 जून 2025

ईरान द्वारा दक्षिणी इसराइल के बेर्शेबा शहर पर किए गए मिसाइल हमले ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। इस हमले में सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब सोरोका मेडिकल सेंटर, जो इस क्षेत्र का प्रमुख अस्पताल है, मिसाइल की चपेट में आ गया।

ईरान का दावा है कि उसका निशाना सैन्य ठिकाने थे, लेकिन अस्पताल को हुआ नुकसान और घायल नागरिकों की बढ़ती संख्या एक अलग ही तस्वीर पेश करती है।


इसराइल का जवाब: “तानाशाही का मूल्य चुकाना होगा”

इस हमले के बाद इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई को “बच निकलने नहीं दिया जाना चाहिए”।

तेल अवीव के पास मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा:

“वो व्यक्ति जो खुलेआम इसराइल को खत्म करने की बात करता है, अब अस्पतालों पर मिसाइल हमले का आदेश दे रहा है। ऐसे व्यक्ति को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी कि “तेहरान के शासक इस अपराध की पूरी कीमत चुकाएँगे।”


सोरोका अस्पताल पर विनाशकारी हमला

सोरोका मेडिकल सेंटर के निदेशक शलोमी कोदेश ने बताया कि हमले में अस्पताल की इमारतों को गंभीर क्षति हुई है। सर्जरी विभाग की एक पुरानी इमारत को हाल ही में खाली कर लिया गया था, जिससे कुछ बड़ी दुर्घटना टल गई।

लेकिन अन्य विभागों में अब भी मरीज़ मौजूद थे, जिनमें से कई घायल हुए हैं। कोदेश ने बताया:

“कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं — ज़्यादातर मरीज़ और स्टाफ जो इमारत के भीतर थे, उन्हें गिरते शीशों और मलबे से चोटें आईं।”

एक मेडिकल छात्रा एरियल हार्पर ने बताया कि धमाके की आवाज़ इतनी ज़ोरदार थी कि पूरी इमारत हिल गई।


अंतरराष्ट्रीय आलोचना और इंसानियत का सवाल

इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने हमले को न केवल सैन्य अपराध बताया, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी इसकी निंदा की:

“एक बच्चा आईसीयू में था, उसकी मां पास में थी। एक बुज़ुर्ग देखभाल केंद्र में थे। ये लोग अब मिसाइलों का निशाना बने हैं।”

उप विदेश मंत्री शैरेन हास्केल ने भी इसे “जानबूझकर नागरिकों को लक्षित किया गया हमला” करार दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आवाज़ उठाने की अपील की।


ईरान का दावा: निशाना सैन्य ठिकाने थे

ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, हमला दरअसल इसराइली सेना के कमांड केंद्र और गाव-यम टेक्नोलॉजी पार्क के भीतर मौजूद एक खुफिया शिविर को लक्षित करने के लिए किया गया था।

ईरान ने कहा कि अस्पताल पर कोई सीधा हमला नहीं किया गया, बल्कि केवल पास में हुए विस्फोट के झटकों से उसे नुकसान पहुंचा है।


तनाव और जंग के बादल

बीबीसी के संवाददाता ह्यूगो बशेगा के अनुसार, यह घटना उस वक्त हुई है जब इसराइल और ईरान के बीच तनाव परमाणु कार्यक्रम को लेकर चरम पर है।

  • इसराइल का दावा है कि ईरान ने परमाणु हथियारों के निर्माण में प्रगति की है।

  • ईरान इसे खारिज करते हुए कहता है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।

इस पूरे घटनाक्रम का अमेरिका पर भी असर है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप इसराइल के साथ सैन्य साझेदारी को लेकर विचार कर रहे हैं।


संभावित नतीजे

विश्लेषकों का मानना है कि:

  • इस हमले के बाद इसराइल ईरान के खिलाफ और तेज़ सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

  • ईरान समर्थित गुट यमन और इराक़ में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

  • यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है — इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ेगा।

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