📍 तेहरान | 22 जून 2025
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को न सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला करार दिया है।
🛑 “अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के नियमों की खुलेआम अवहेलना”
अब्बास अराग़ची ने अपने आधिकारिक एक्स (Twitter) हैंडल पर लिखा:
“संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला कर न केवल यूएन चार्टर का उल्लंघन किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून और NPT का भी ग़लत उदाहरण पेश किया है।”
उनके अनुसार, यह हमला महज़ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक “क्रूर और अराजक क़दम” है, जिसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा।
⏳ “लंबे समय तक दिखेगा असर”
ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि इन हमलों का प्रभाव दीर्घकालिक होगा:
“आज सुबह की घटनाएं क्रूर हैं और इसका असर लंबे समय तक देखने को मिलेगा। दुनिया के हर देश को इस बेहद ख़तरनाक और आपराधिक व्यवहार के प्रति चिंतित होना चाहिए।”
उन्होंने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती बताया।
⚖️ ईरान के पास ‘वैध आत्मरक्षा के सभी विकल्प’ खुले
अब्बास अराग़ची ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा प्राप्त है:
“हम अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी वैध विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।”
इस बयान को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आगामी जवाबी रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
📍 किन ठिकानों पर हुआ हमला?
रविवार सुबह अमेरिका ने ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़, और इस्फ़हान स्थित परमाणु प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले किए। इन जगहों को ईरान के सिविलियन न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा माना जाता है।
🇮🇱 इसराइल ने दी पुष्टि
उधर, इसराइल ने इन हमलों में लॉजिस्टिक और खुफिया सहयोग देने की बात मानी है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल इस सहयोग के स्तर पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।
🔍 निष्कर्ष: कूटनीति या टकराव?
ईरान का स्पष्ट संकेत है कि वह कूटनीतिक मंचों के साथ-साथ सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या यह स्थिति पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ेगी या वैश्विक दबाव के चलते संवाद और समाधान का रास्ता निकलेगा।
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