नई दिल्ली/अबू धाबी/टोक्यो: भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए न केवल सैन्य स्तर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने और पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए कूटनीतिक मोर्चा खोल दिया है। इसके तहत सात बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेजा गया है। गुरुवार को पहला कदम जापान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रखा गया।
यूएई में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
अबू धाबी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएई की फ़ेडरल नेशनल काउंसिल के सदस्य अहमद मीर खोरी से मुलाकात कर पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकवादी गतिविधियों और भारत की जवाबी रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी। शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत ने आतंक के खिलाफ सटीक और सीमित सैन्य कार्रवाई की।
डॉ. शिंदे ने सोशल मीडिया पर बताया, “हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और भारत की रक्षा नीति को गर्व के साथ साझा किया। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई किसी भी राजनीतिक भेदभाव से ऊपर है।”
यूएई की ओर से डॉ. अली राशिद अल नूमी ने कहा, “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और यह पूरी मानवता के लिए एक साझा खतरा है। इस पर वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।”
जापान में भी हुआ आतंक पर खुलासा
दूसरा प्रतिनिधिमंडल जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचा, जहां उन्होंने पाक प्रायोजित आतंकवाद के सबूत साझा किए और भारत की कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराया। जदयू सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस, भाजपा, टीएमसी, माकपा के प्रतिनिधियों सहित पूर्व राजनयिक भी शामिल रहे।
भारतीय दूतावास ने बयान जारी कर बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने जापानी अधिकारियों और थिंक टैंकों को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी।
जापानी रणनीतिक विश्लेषक सतोरू नागाओ ने भारत के कदम को सही और संतुलित बताया। उन्होंने कहा, “भारत की कार्रवाई सीमित, उद्देश्यपूर्ण और आतंक के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश थी। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी।”
घटनाक्रम का पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई। इसके प्रतिशोध में भारत ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकी अड्डों पर सर्जिकल हमले किए। पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की कोशिश 8 से 10 मई के बीच हुई, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने सख्ती से मोर्चा संभाला। अंततः 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच संवाद के बाद संघर्षविराम पर सहमति बनी।
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