नीदरलैंड/नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्षविराम पर कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था, और दोनों देशों ने सीधे सैन्य संचार के ज़रिए बातचीत की। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कोई आतंकी पाकिस्तान में छिपा है, तो भारत उसे वहीं जाकर निशाना बनाएगा।
डच प्रसारक NOS को दिए गए एक इंटरव्यू में जयशंकर ने बताया कि पाकिस्तान ने भारत से संपर्क किया और संघर्षविराम की पहल की, जिसके बाद सैन्य स्तर पर संवाद हुआ। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि अमेरिका या खाड़ी देशों जैसे बाहरी देशों ने कोई मध्यस्थता की हो।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आया बदलाव
जयशंकर ने बताया कि पाकिस्तान द्वारा यह संपर्क भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुआ, जो 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था। इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन आतंकियों को निशाना बनाना था, जो भारत में हमलों के लिए जिम्मेदार हैं और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र भी सूचीबद्ध कर चुका है।
उन्होंने कहा, “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में हैं, तो हम उन्हें वहीं मारेंगे। यह ऑपरेशन कोई पारंपरिक युद्ध नहीं है, बल्कि एक संदेश है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा।”
सीधे सैन्य हॉटलाइन से हुई बातचीत
जयशंकर के अनुसार, 10 मई को पाकिस्तान की सेना ने भारत से हॉटलाइन पर संपर्क किया और संघर्षविराम की इच्छा जताई। भारत ने भी उसी माध्यम से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के कुछ देशों ने जरूर चिंता जताई, लेकिन कोई औपचारिक या अनौपचारिक मध्यस्थता नहीं हुई — समझौता केवल भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ।
“हमने साफ कर दिया था कि अगर पाकिस्तान को सीजफायर चाहिए, तो वह सीधे हमसे संपर्क करे — और उन्होंने यही किया,” जयशंकर ने कहा।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगा। उन्होंने पहलगाम की घटना को याद करते हुए कहा कि उसमें 26 निर्दोष पर्यटकों को मार दिया गया था, और यह हमला केवल निर्दोष लोगों को नहीं बल्कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था और धार्मिक सद्भाव को भी नुकसान पहुंचाने के मकसद से किया गया था।
“ऑपरेशन सिंदूर एक सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि एक संदेश है — आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस,” उन्होंने कहा।
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