बीजिंग:
चीन ने जापान से समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात पर लगाए गए दो साल पुराने प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटा दिया है। यह कदम जापान द्वारा परमाणु अपशिष्ट जल के निस्तारण को लेकर लंबे समय से चली आ रही विवादित स्थिति को आंशिक रूप से सुलझाने की दिशा में उठाया गया है।
चीन और जापान के बीच व्यापारिक रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन क्षेत्रीय विवादों और सैन्य व्यय में वृद्धि के चलते बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं।
इतिहास भी इस रिश्ते को प्रभावित करता है — द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान जापान द्वारा चीन के कुछ हिस्सों पर किए गए अत्याचार अब भी एक संवेदनशील मुद्दा हैं। बीजिंग बार-बार टोक्यो पर आरोप लगाता रहा है कि उसने अतीत की गलतियों के लिए पर्याप्त पश्चाताप नहीं किया है।
फुकुशिमा जल विवाद की पृष्ठभूमि
2023 में जापान ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से उपचारित अपशिष्ट जल को समुद्र में छोड़ना शुरू किया था।
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यह संयंत्र 2011 की भयावह भूकंप और सुनामी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जिससे तीन रिएक्टरों में मेल्टडाउन हो गया था।
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संयंत्र के ऑपरेटर TEPCO और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दावा किया कि सभी हानिकारक रेडियोधर्मी तत्व निकाल दिए गए हैं, केवल ट्रिटियम बचा है, जो वैज्ञानिकों के अनुसार सुरक्षित सीमा में है।
लेकिन चीन ने इस कदम को पर्यावरण के प्रति गैर-जिम्मेदार करार देते हुए कड़ी आलोचना की और जापानी समुद्री उत्पादों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद रूस ने भी इसी तरह का निर्णय लिया।
अब क्या बदला है?
रविवार को चीनी सीमा शुल्क प्राधिकरण ने कहा कि फुकुशिमा के उपचारित जल के दीर्घकालिक नमूनों में कोई असामान्यता नहीं पाई गई।
इसके आधार पर, चीन ने निर्णय लिया कि वह कुछ शर्तों के साथ जापानी सीफूड के आयात को बहाल करेगा।
हालांकि यह छूट जापान के 47 में से 10 प्रान्तों के लिए लागू नहीं होगी — जिनमें फुकुशिमा और टोक्यो भी शामिल हैं। वहां से आयात पर अभी भी रोक जारी रहेगी।
जापान की प्रतिक्रिया
जापान सरकार ने चीन के इस निर्णय का स्वागत किया है।
उपमुख्य कैबिनेट सचिव काजुहिको ओआकी ने टोक्यो में मीडिया से कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जापान अब भी चीन से मांग करता है कि बाकी 10 प्रान्तों से भी आयात प्रतिबंध हटाया जाए।
कृषि मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने इस फैसले को “एक बड़ी उपलब्धि” बताया।
आगे की शर्तें और प्रक्रियाएं
बीजिंग के अनुसार, वे जापानी कंपनियाँ जो पहले व्यापार कर रही थीं और अब दोबारा निर्यात करना चाहती हैं, उन्हें फिर से पंजीकरण कराना होगा और उन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में ही चीन ने संकेत दे दिया था कि वह आयात को धीरे-धीरे फिर से शुरू करेगा, लेकिन अब जाकर यह आंशिक राहत औपचारिक रूप में लागू हुई है।
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