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बिलासपुर जिले के रतनपुर, कोटा और बेलगहना के जंगलों में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। बाघ की बढ़ती हलचल से ग्रामीणों में डर का माहौल है, वहीं वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
बाघ की बढ़ती गतिविधियां
कुछ दिनों से इन इलाकों में बाघ की आवाजें सुनाई दे रही हैं और मवेशियों के शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। रतनपुर रेंज के कंचनपुर गांव में बाघ के पंजों के निशान मिले हैं, जिसके बाद वहां नदी किनारे 8 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों से बाघ की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।
बाघ के साथ दिखे शावक
कोटा और बेलगहना के जंगलों में भी बाघ की मौजूदगी देखी गई है। कुछ लोगों ने बताया कि बाघ के साथ दो छोटे शावक भी दिखाई दिए हैं। वन विभाग यह जांच कर रहा है कि यह बाघ अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से बाहर आया है या किसी अन्य जंगल से यहां पहुंचा है। कोटा से रतनपुर तक बाघों की संख्या 14 तक पहुंच चुकी है।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से कहा गया है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और सतर्क रहें। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं ताकि इंसानों और बाघों के बीच कोई अप्रिय घटना न हो।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
बिलासपुर के डीएफओ सत्यदेव शर्मा ने बताया,
“रतनपुर और कोटा के जंगलों में बाघ के साथ शावक भी देखे गए हैं। कुछ जगहों पर पंजों के निशान मिले हैं। अब ट्रैप कैमरे लगाकर बाघ की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।”
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