नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का एक बयान इन दिनों देश की राजनीति में हलचल मचा रहा है। पोखरा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की कुंडली को लेकर टिप्पणी की और चुटकी लेते हुए कहा कि अब तो सभी नेताओं की कुंडली बनवानी चाहिए। इस मज़ाकिया बयान ने गंभीर राजनीतिक संकेत भी दे दिए हैं।
राजशाही की वापसी पर ओली का दो टूक जवाब
राष्ट्रीय युवा संघ नेपाल के 10वें महाधिवेशन के उद्घाटन के दौरान पीएम ओली ने स्पष्ट कर दिया कि नेपाल में राजशाही का कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने कहा, “आजकल 15 तारीख को राजा को फिर से गद्दी पर बैठाने की बातें हो रही हैं। शायद कोई अपने ही घर में गद्दी सजाने की सोच रहा हो। लेकिन जनता ने राजशाही को नकार दिया है। अब देश लोकतांत्रिक संविधान, संसद और राष्ट्रपति व्यवस्था के तहत चल रहा है।”
“अब हर नेता की कुंडली बनवाएं”
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की कुंडली पढ़े जाने पर तंज कसते हुए ओली ने कहा, “आपने ज्ञानेंद्र की कुंडली देखी, अब मेरी भी देख लीजिए। क्या सिर्फ एक ही व्यक्ति का भविष्य देखा जाएगा? यहां तो और भी कई लोग हैं जिनकी किस्मत देश के भविष्य से जुड़ी है।” इस व्यंग्यात्मक बयान ने कुंडली और ज्योतिष को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
राजशाही समर्थकों पर तंज
राजशाही समर्थक अभियानों को ‘भ्रम फैलाने वाला’ बताते हुए ओली ने कहा, “जैसे मेंढक भादौं के बाद टर्राना बंद कर देता है, वैसे ही राजावादी आवाजें भी समय के साथ शांत हो जाएंगी। ये सिर्फ अस्थायी शोर हैं। जनता को इनसे बहकना नहीं चाहिए।”
सोशल मीडिया पर कुंडली बनाम राजनीति
ओली के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ‘कुंडली राजनीति’ विषय बन गया है। जहां एक तरफ कुछ लोग इसे व्यंग्य के रूप में ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नेपाल की राजनीति अब ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के इर्द-गिर्द घूमेगी?
विपक्षी साजिश का आरोप
अपने संबोधन के अंत में ओली ने यह भी कहा कि कुछ शक्तियाँ उनकी पार्टी, नेकपा-यूएमएल, को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप फैला रही हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के दुष्प्रचार से सावधान रहें।
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