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पानी और देखभाल की कमी से ताले पड़े स्वच्छता परिसरों पर
पुष्पराजगढ़ जनपद में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन उनका संचालन शुरू नहीं हो सका। कई ग्राम पंचायतों में बने ये स्वच्छता परिसर लगभग दो साल से बंद पड़े हैं, जिन पर ताले लटक रहे हैं।
देखरेख के अभाव में हो रहे जर्जर
देखभाल और पानी की व्यवस्था न होने के कारण कई परिसरों की हालत खराब हो चुकी है। दीवारें टूटने लगी हैं और सुविधाएं उपयोग के लायक नहीं बची हैं। राजेंद्र ग्राम में बनाए गए तीन स्वच्छता परिसरों में भी ताले लगे हुए हैं। इनमें से एक तहसील परिसर में है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में अधिवक्ता और पक्षकार आते हैं। फिर भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
महिलाओं को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
इन परिसरों का बंद होना खासतौर पर महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है। स्वच्छता परिसरों का निर्माण सरकार की योजना का हिस्सा था, लेकिन इनके बंद होने से लोगों को सुविधा नहीं मिल रही है।
कई जगहों पर निर्माण अधूरा
कुछ जगहों पर स्वीकृति मिलने के दो साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। ग्राम पंचायत बहपुर इसका उदाहरण है, जहां दो स्वच्छता परिसरों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हुआ।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
- अर्जुन सिंह, सरपंच, किरगी: पानी की व्यवस्था की जा रही है। जैसे ही पानी की समस्या हल होगी, परिसरों को चालू कर दिया जाएगा।
- गणेश पांडे, सीईओ, जनपद पंचायत: परिसरों को शुरू करने के लिए कई समूहों से बातचीत चल रही है। बातचीत पूरी होते ही उन्हें चालू कर दिया जाएगा।
लोगों की नाराजगी
स्थानीय लोग सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित बताते हैं। उनका कहना है कि योजनाओं को लागू करने में प्रशासन की लापरवाही साफ नजर आती है। स्वच्छता परिसर बंद रहने से लोगों को खुली जगहों पर जाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
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