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प्रभारी मंत्री जी, छिंदवाड़ा में बजट लेकर आइए, विकास कार्यों को आगे बढ़ाइए

कृषि-हार्टीकल्चर कॉलेज और अन्य योजनाओं पर ध्यान जरूरी
छिंदवाड़ा. प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने प्रभारी मंत्री के रूप में पहली बार छिंदवाड़ा का दौरा किया। गुरुवार को वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले की योजनाओं की समीक्षा करेंगे। इस दौरान जिले के नागरिकों को उम्मीद है कि मंत्री जी आर्थिक रूप से कमजोर नगर निगम को बजट का सहारा देंगे। साथ ही कृषि-हार्टीकल्चर कॉलेज, डॉ. शंकर शाह विश्वविद्यालय भवन और सिंचाई कॉम्प्लेक्स जैसी लंबित योजनाओं को गति देंगे।

विकास कार्य ठप होने से निराशा
साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से छिंदवाड़ा के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में हैं। इनमें विश्वविद्यालय, कृषि कॉलेज, और जेल कॉम्प्लेक्स जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। बजट कटौती और टेंडर निरस्त होने से इन योजनाओं पर काम नहीं हो सका। अब, भाजपा के सांसद बंटी साहू और अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह के चुने जाने के बाद विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं।

नगर निगम में वेतन का संकट
नगर निगम की आर्थिक स्थिति खराब है। चुंगी क्षतिपूर्ति राशि में कटौती के कारण पिछले तीन-चार महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा। महापौर विक्रम अहके ने राज्य सरकार को 130 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

हार्टीकल्चर कॉलेज और विश्वविद्यालय अधूरे
कमलनाथ सरकार ने हार्टीकल्चर कॉलेज के लिए खुनाझिरखुर्द में 230 एकड़ जमीन और 146 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। लेकिन कॉलेज भवन नहीं बनने से 129 छात्र छोटे भवन में पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय भवन निर्माण भी सारना में अब तक शुरू नहीं हुआ।

महिलाओं के स्व-सहायता समूहों की हालत खराब
महिला एवं बाल विकास विभाग के स्व-सहायता समूहों को पिछले आठ महीनों से भुगतान नहीं किया गया है। किराना और सब्जी दुकानदारों ने भी समूहों को उधार देना बंद कर दिया है। मुख्यमंत्री ने अक्टूबर तक भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं हुआ।

लंबित योजनाओं पर ध्यान जरूरी

  1. जुन्नारदेव और परासिया जिले के विकास प्रस्ताव ठप पड़े हैं।
  2. 4500 करोड़ की सिंचाई कॉम्प्लेक्स योजना धीमी गति से चल रही है।
  3. लहगडुआ में गारमेंट पार्क प्रोजेक्ट अब तक लंबित है।
  4. पेंच नदी बाढ़ में क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ।
  5. बेसहारा बालिकाओं के लिए बालिका गृह की आवश्यकता है।
  6. छिंदवाड़ा को स्मार्ट सिटी, जैव विविधता पार्क, और टाउन हॉल जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
  7. पेंच की विष्णुपुरी माइंस और कन्हान क्षेत्र की माइंस से संबंधित पर्यावरण स्वीकृतियां लंबित हैं।

मंत्री जी से अपेक्षा
अब छिंदवाड़ा की जनता को मंत्री राकेश सिंह से उम्मीद है कि वह बजट दिलवाकर विकास योजनाओं को नई गति देंगे। उनके नेतृत्व से जिले को नई ऊर्जा मिल सकती है।

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