वॉशिंगटन, डीसी: अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक अहम सुरक्षा निर्णय लेते हुए, पेंटागन में पत्रकारों की आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। यह कदम हाल ही में सोशल मीडिया पर गोपनीय सैन्य जानकारी के लीक होने के बाद उठाया गया है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, पत्रकार अब पेंटागन के अधिकांश हिस्सों में स्वतंत्र रूप से प्रवेश नहीं कर पाएंगे, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां होती हैं।
सुरक्षा लीक के बाद लिया गया फैसला
हालिया महीनों में यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी अभियानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आ गई थी। इससे पेंटागन की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे। ट्रंप प्रशासन की इस दूसरी पारी में, यह एक सख्त संदेश है कि रक्षा से जुड़े मामलों में अब सिर्फ अधिकृत सूचना ही सार्वजनिक की जाएगी।
जर्नलिस्ट्स की मूवमेंट अब होगी सीमित
नए आदेश के अनुसार:
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पत्रकारों को अब पेंटागन के थर्ड फ्लोर पर रक्षा मंत्री के कार्यालय वाले क्षेत्र — ई-रिंग, कॉरिडोर 8 और 9 के बीच — जाने की अनुमति नहीं होगी।
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रक्षा सचिव से संवाद के लिए केवल उनके पब्लिक अफेयर्स असिस्टेंट की उपस्थिति में ही पत्रकारों को प्रवेश मिलेगा।
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ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय और यहां तक कि पेंटागन के जिम जैसी जगहों पर भी मीडियाकर्मियों की एंट्री अब पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।
प्रेस बैज और लिखित सहमति अनिवार्य
पेंटागन में अब प्रवेश करने वाले पत्रकारों को ‘प्रेस’ बैज पहनना जरूरी होगा और उन्हें क्लासिफाइड सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर लिखित आश्वासन देना होगा। किसी अधिकारी से मिलने के लिए पत्रकार को पूर्व निर्धारित अनुमति और एस्कॉर्ट के साथ ही ले जाया जाएगा।
भारत में पहले से लागू हैं ऐसे नियम
गौरतलब है कि भारत में भी रक्षा मंत्रालय (South Block) में येलो आई-कार्ड धारक चुनिंदा पत्रकारों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। वे भी केवल मीडिया विभाग तक ही सीमित रहते हैं, मंत्रालय के अन्य हिस्सों में उनकी एंट्री नहीं होती।
क्या है पेंटागन?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय पेंटागन वाशिंगटन डीसी के पास वर्जीनिया में स्थित है और यह लगभग 70 लाख स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। इसमें सात मंज़िलें हैं, जिनमें दो बेसमेंट में हैं। यह अमेरिका के सैन्य निर्णयों का केंद्र बिंदु है, जहां रक्षा सचिव, ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के कार्यालय मौजूद हैं।
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