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बाड़मेर: वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल मार्केटिंग ने कई युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया। बाड़मेर के युवाओं ने हस्तशिल्प उत्पादों को ऑनलाइन बेचकर करोड़ों का कारोबार खड़ा कर लिया। आज ये उत्पाद 45 देशों तक पहुंच चुके हैं, और 6000 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिला है।
बाड़मेर का पारंपरिक हस्तशिल्प ऑनलाइन बिक रहा
बाड़मेर में अजरख प्रिंट और कांथा वर्क काफी मशहूर हैं। पहले यहां की महिलाएं कढ़ाई और बुनाई का काम करती थीं, लेकिन उनके उत्पाद सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित थे। कोरोना के दौरान व्यापार पर असर पड़ा तो युवाओं ने डिजिटल मार्केटिंग के जरिए इसे ऑनलाइन बेचना शुरू किया। अब ये प्रोडक्ट विदेशों तक भी पहुंच रहे हैं।
विनय खत्री: 6000 महिलाओं को रोजगार दिया
विनय खत्री ने एमबीए के बाद बड़ी कंपनियों में नौकरी की बजाय पारिवारिक व्यापार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने अजरख प्रिंट के उत्पादों को ऑनलाइन बेचना शुरू किया और आज 6000 महिलाओं और 40 से ज्यादा आर्टिसियन्स को रोजगार दे रहे हैं।
रीटा महेश्वरी: भाई के काम को आगे बढ़ाया, 11 देशों तक पहुंचाया बिजनेस
कोरोना के दौरान भाई हरीश महेश्वरी की मृत्यु के बाद, रीटा महेश्वरी ने उनके हैंडीक्राफ्ट बिजनेस को संभाला। अब वे जयपुर से कारोबार चला रही हैं, और 11 देशों में उत्पाद बेच रही हैं। उनका माल गडरारोड़ से तैयार होकर जयपुर के खरीदारों तक पहुंचता है।
रोहित महेश्वरी: सोशल मीडिया और वेबसाइट से बढ़ाया व्यापार
बाड़मेर के रोहित महेश्वरी ने कोरोनाकाल में घर से ही इस व्यवसाय की शुरुआत की। उन्होंने प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर रजिस्ट्रेशन करवाया और अपने उत्पादों की मार्केटिंग शुरू की। अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों की वजह से उन्हें लगातार ऑर्डर मिलने लगे और उनका कारोबार बढ़ गया।
इंटरनेशनल प्लेटफार्म से मिल रही पहचान
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर पंजीकरण करवाने से इन उत्पादों को दुनियाभर में खरीदार मिल रहे हैं। साड़ी, कुर्ती, चद्दर और रल्ली जैसे उत्पादों की बहुत मांग है। बाड़मेर और कच्छ (गुजरात) के हस्तशिल्प की खास पहचान बन चुकी है। डिजिटल दुनिया में युवा अब वर्क फ्रॉम होम के जरिए अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
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