भोजपुर के नारायणपुर के भलुनी गांव में आर्थिक अपराध इकाई ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया। मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। गांव में लोगों को दिखाने के लिए मुकेश खेती करता था, लेकिन असल में वह घर के छोटे कमरे से ग्लोबल साइबर क्राइम चला रहा था।
सिंडिकेट कैसे काम करता था
जांच में पता चला कि मुकेश और उसके सहयोगी SIM बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल करके VOIP कॉल को लोकल GSM कॉल में बदलते थे। इससे दूरसंचार विभाग को अकेले 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस तकनीक का फायदा कंबोडिया और थाईलैंड के साइबर ठग उठाते थे।
खुलासे का तरीका
10 जुलाई 2025 को दूरसंचार विभाग ने EOU को सूचना दी कि भोजपुर में संदिग्ध गतिविधि चल रही है। टावर डेटा, IMEI और कॉल पैटर्न की जांच से अवैध सिम-बॉक्स का पता चला। इसका इस्तेमाल इंटरनेशनल कॉल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क से रूट करने और ठगी करने के लिए किया जा रहा था।
जांच और बरामदगी
29 जुलाई को EOU की SIT टीम ने नारायणपुर और भलुनी में छापेमारी की। मुकेश घर पर नहीं था, लेकिन उसकी पत्नी सुमन देवी ने बताया कि मुकेश दो साल से यह नेटवर्क चला रहा था।
जांच में बरामद सामान:
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2 × 32-स्लॉट सिम बॉक्स
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2 × 256-सॉफ्ट सिम बॉक्स
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186 सिम कार्ड (BSNL, Airtel, Vodafone-Idea, Jio)
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राउटर, बायोमेट्रिक डिवाइस, लैपटॉप, बैंक कार्ड, पहचान पत्र
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81,000 रुपये नकद
संदिग्ध नंबर और संचालन
दूरसंचार विभाग ने 67 संदिग्ध मोबाइल नंबर EOU को दिए। ये नंबर पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के दो बिक्री केंद्रों से एक्टिवेट किए गए थे। ऑपरेशन में कुछ कॉमन सर्विस सेंटर ऑपरेटरों ने सरकारी स्कीम के बहाने लोगों का बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा किया और बड़ी संख्या में सिम कार्ड हासिल किए। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया गया।
इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का नेटवर्क खुल गया और मुकेश समेत अन्य लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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