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शेड नेट में खेती से हुआ मुनाफा
डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड के शोभापुर गांव की जलावती दीदी आज महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। पहले उनकी आय का साधन केवल पारंपरिक खेती थी, जिसमें वह धान, गेहूं और भाजी जैसी फसलें उगाती थीं। लेकिन इससे ज्यादा मुनाफा नहीं होता था।
अजीविका मिशन से मिली मदद
जलावती दीदी को अजीविका मिशन और स्वयं श्री परियोजना के तहत शेड नेट खेती की तकनीक सिखाई गई। उन्होंने मिशन से 15,000 रुपए की मदद ली, जिससे शेड नेट लगाने और बीज-खाद की व्यवस्था की। इसके साथ ही, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और शेड नेट के लिए सब्सिडी भी मिली। उन्होंने 5 डेसीमल जमीन पर शेड नेट लगाकर उन्नत खेती की शुरुआत की।
फसल और मुनाफा
पहले सीजन में उन्होंने खीरा और दूसरे सीजन में बरबटी की खेती की। शेड नेट और ड्रिप सिंचाई की मदद से उन्होंने पानी और खाद की बचत की। जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर फसल को रोगों से बचाया। पहली फसल से उन्हें 25,000 रुपए और दूसरी फसल से 11,000 रुपए का मुनाफा हुआ। कुल मिलाकर दोनों सीजन से 36,000 रुपए की कमाई हुई।
गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा
शेड नेट खेती से न केवल जलावती दीदी की आय में वृद्धि हुई, बल्कि उनके गांव की 9 अन्य महिला किसानों का जीवन भी बदला। यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल बन गई है। जलावती दीदी अब सरस्वती स्व सहायता समूह से जुड़कर अन्य महिला किसानों को प्रेरित कर रही हैं।
खेती में नई राह
जलावती दीदी का कहना है कि अजीविका मिशन ने उनकी जिंदगी बदल दी है। शेड नेट खेती ने उन्हें और उनके परिवार को आत्मनिर्भर बनाया है। यह तकनीक गांव में खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का शानदार उदाहरण है।
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