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मुरैना। जिले में कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट नहीं हुआ है। सबलगढ़ की एक गर्भवती महिला इलाज के लिए ग्वालियर गई थी, जहां उसे बुखार और सर्दी-जुकाम होने पर टेस्ट कराया गया। 23 जून को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर महिला को ग्वालियर अस्पताल में ही आइसोलेट कर दिया गया।
हालांकि महिला के घर पर स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे जरूर कराया, लेकिन किसी परिजन में लक्षण नहीं मिलने पर उनका सेंपल नहीं लिया गया।
जिले में न कोरोना वार्ड, न जांच व्यवस्था
जिला अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में न तो कोरोना वार्ड बना है और न ही बुखार, सर्दी-जुकाम के मरीजों की जांच हो रही है। सेम्पलिंग की कोई सुविधा नहीं है। अगर कोई संदिग्ध मरीज आता है तो उसे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
इलाज में लापरवाही, मरीजों की भीड़
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जिला अस्पताल में 300 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं, जिनमें से अधिकतर को बुखार, सर्दी-जुकाम है।
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डॉक्टर्स का कहना है कि यह बुखार लंबे समय तक बना रहता है और अगर इनकी जांच हो तो कुछ मरीज कोरोना पॉजिटिव निकल सकते हैं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां
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अस्पताल में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है।
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एक मरीज के साथ तीन-चार अटेंडर अंदर बैठे होते हैं।
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मास्क और सैनिटाइजर की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
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सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं हो रहा।
अधिकारियों के बयान:
डॉ. महेन्द्र यादव, महामारी विशेषज्ञ:
“महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, लेकिन उसके परिवार में किसी में लक्षण नहीं दिखे, इसलिए सेंपलिंग नहीं की गई।”
डॉ. पदमेश उपाध्याय, सीएमएचओ:
“जिले के हर अस्पताल में पांच बेड कोरोना के लिए आरक्षित किए गए हैं। लेकिन सेम्पलिंग की सुविधा नहीं है। संदिग्ध मरीजों को ग्वालियर भेजा जाएगा।”
निष्कर्ष:
कोरोना के मामले सामने आने के बावजूद मुरैना जिले का स्वास्थ्य विभाग तैयार नहीं है। न जांच हो रही है, न इलाज की व्यवस्था दुरुस्त है। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
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