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उत्तर प्रदेश की कर्नलगंज सीट पर राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। यहां दो बड़े राजघरानों के बीच लंबे समय से मुकाबला चलता आया है।
2022 में बदले राजनीतिक समीकरण
2022 के चुनाव में पहली बार दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी एक साथ आए, लेकिन बीजेपी के अजय सिंह जीत गए। इस जीत में बृजभूषण शरण सिंह के समर्थन को अहम माना गया।
अजय सिंह का दावा
अजय सिंह का कहना है कि उन्होंने राजनीति को राजघरानों से निकालकर आम जनता तक पहुंचाया है। उनके अनुसार अब जनता की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकार विकास के बजाय राजनीति कर रही है। उनका कहना है कि 2027 में वे वापसी करेंगे।
जातीय समीकरण अहम
इस सीट पर ब्राह्मण, यादव, क्षत्रिय और मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं। यहां जातीय समीकरण चुनाव का परिणाम तय करते हैं।
बृजभूषण की ‘किंगमेकर’ भूमिका
स्थानीय लोगों का मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन जिस उम्मीदवार को मिलता है, उसकी जीत की संभावना बढ़ जाती है।
2027 चुनाव पर नजर
अब चर्चा है कि बृजभूषण इस बार किसी नए उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है।
कुल मिलाकर, 2027 का चुनाव कर्नलगंज में ‘पुरानी विरासत बनाम नए चेहरे’ के बीच होने वाला है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
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